नवेद चौधरी
नवेद चौधरी

कश्मीर के हालात कैसे हैं इसका अंदाज़ा वायरल हो रही उस विडियो से लगा लीजिए जिसमे भारतीय सेना के कुछ जवान कश्मीरियों के घरों पर पत्थरबाज़ी कर रहें हैं,कश्मीरियों को ललकारा जा रहा है,उन्हें उकसाया जा रहा है कहा जा रहा की निकलों घरो से बाहर फ़िर हम तुम्हें मारेंगे पिछली बारी तो बस पेलेट से ही अंधा किया था अब जान से मारा जाएगा.. इस सारे प्रकरण के पीछे कुछ सवाल हैं जो अंदर से कचोट रहें की सेना के जवानों को किसने आदेश दिया की वो किसी आम शहरी के घर पर पत्थर बरसाए ??

क्या देश का संविधान इसकी इजाज़त देता है की किसी को ललकार कर उसके घर के बाहर बुलाया जाए और इस फ़िराक़ में रहा जाये की जब वो शहरी बाहर आए तो गलियों में घात लगाए बैठे सैनिक इस इंतेज़ार में हों की कोई निकले तो हम सरकारी लोहा उसकी छाती के पार कर दें.

विडियो में वो मानसिकता साफ़ झलक रही है जिस मानसिकता को लेकर पेलेट गन्स का इस्तेमाल किया होगा.?

अगर कश्मीरी आग उगल रहें हैं तो भारतीय सेना भी वहां फूल नही बरसा रही है,वह तो पत्थरबाज़ी कर रहें हैं,आज के वक़्त में कुछ अलगाववादी कश्मीरी अगर सेना पर पत्थर मार रहें हैं तो पलट कर सेना गोली चला देती है,भले ही वो गोली पेलेट गन से निकले या AK47 से सेना को ज़रा भी परवाह नही,केंद्र में चाहे कोई भी सरकार रही हो,कश्मीर में मौत का तांडव कभी कम नही हुआ रह रहकर सेना की बर्बरता से मौतें बढ़ी ही हैं और मौतों के साथ बढ़ी हैं बीच की दूरियां जी हाँ वही दूरियां जो हमेशा भारत सरकार और कश्मीरियों के बीच रहीं हैं,वही दूरियां जो कश्मीरी और सेना के बीच रहीं हैं.

जिसे ना तो कश्मीरियों ने भरने की सोची और न ही सेना ने.कश्मीरियों के मुताबिक सेना ने हमेशा उन्हें तंग और उनका शोषण ही किया है,बहोत साल पहले एक कश्मीरी से बात हुई थी उसका नाम तो मुझे याद नही पर उसकी कही बात मुझे याद है, इस मुद्दे पर तब मेरा सवाल यही था की भाई क्यों आज़ादी चाहते हो क्या मिलेगा भारत से अलग होकर.? इस पर वे कश्मीरी बोलता है सर कोई आतंकी कोई मिल्लिटेंट जन्म से नही होता हालात उसे बना देते हैं,आप कहते हैं की हम भारत और उसकी सेना की इज्ज़त करें.? तो भाई इस पर मेरा सवाल आपसे है की रात के 2 बजे सेना आपके गाँव में घुस आए सर्च ओपरेशन के नाम पर आपके सभी घर वालो को घर से बाहर बुलाया जाये और तलाशी शुरू की जाए,जो इस तलाशी पर सवाल उठाये तो उसे या तो गिरफ्तार करने की धमकी दी या फ़िर कहा जाए की एनकाउंटर कर दिया जाएगा हमे अपना काम करने दो,काफी देर तक सर्च ऑपरेशन चलता रहा और आप डरे खड़े रहे,तब सेना के हाथ कुछ नही लगा तो आपके भाई आपके रिश्तेदारों में से 2/3 लोगो को सेना उठा लेती है और ले जाती है,आप पूछते हैं की सर किस लिए उठा ले जा रहें हैं तो आपको बड़े अधिकारी का जवाब मिले की पूछ ताछ के लिए लेकर जा रहें हैं सुबह छोड़ देंगे,सुबह आपको अख़बार में एक खबर पढने को मिले की आपका एक रिश्तेदार एनकाउंटर में मारा गया,हिन्दोस्तान में पाकिस्तान के लिए दहशतगर्दी करता था,अब आप और डर जाते हैं क्यों की उस रिश्तेदार के साथ साथ बीती रात आपके भाई को भी उठाया गया था.

भाई की खबर लेने जब आप सेना के कैंप की तरफ़ जाते हैं तो आपको अंदर जाने नही दिया जाता और डांटते हुए आपसे कहा जाता है की तेरे भाई को रात को ही छोड़ दिया था हमे नही पता,काफी ढूंडने के बाद भी भाई का कुछ सुराग़ नही मिलता उस रात को बीते हुए भी 5 साल हो जाएँ और रोज़ आपकी भाभी आपकी भतीजी को झूठा दिलासा देती हो की तेरे अब्बू जल्द आएंगे जब की आपको पता हो की वो अब कभी नही आएगा.दुसरे सर्च ओपरेशन में आपके गाँव में 13 साल की बच्ची से लेकर 60 साल की औरत तक सेना द्वारा सबसे आपकी आँखों के सामने बलात्कार किया जाए तो साहब आप बताओ इतनी ज़ियात्तियों के बाद क्या आप इस सेना इस देश में मोहब्बत करने के लायक़ रहोगे..?क्या बदला लेने की भावना नही जागेगी आपके अंदर..?

सर ऐसे सेकड़ो केस हैं जो कश्मीर में बर्फ के निचे दफ़्न हैं,यहाँ के पहाड़ इन चीखों को बाहर तक जाने नही देते,इससे भी ज़्यादा बर्बरता होती है कश्मीरियों के साथ इससे भी ज़्यादा तकलीफ़ देती है ये सेना हमे.

सब सुनने के बाद बस सर झुकता चला गया उन सवालों के जवाब मैं कभी दे नही पाउँगा उसका अफ़सोस सदा रहेगा..

कश्मीरियों में इतनी नफ़रत सेना की वजह से ही है और ये नफरत मोहब्बत में सेना ही बदल सकती है,लेकिन कश्मीरियों और सेना के बीच की खाई भरने के लिए ना तो सेना ही आगे आरही है और ना ही कश्मीरी,और विडियो वाली घटना से तो कभी खाई भर ही नही सकती ये तो बढती ही जाएगी बस बढती ही जाएगी.

कश्मीरियों के ज़ख्मो में नमक की जगह मरहम लगाने की ज़रूरत है,साथ ही सेना को भी चाहिए विडियो में दिखाई दे रही ज़ियात्तियां दोबारा ना की जायें. हमे कश्मीरियों के खून में भारतीय खून जिस दिन दिख जाएगा उस दिन हम कश्मीरियों को अपना मान लेंगे.पर अफ़सोस अगर कश्मीरी अपने आपको भारतीय नही मानते तो हमने भी कभी उन्हें अपना माना ही नही.ये ज़रूरत है और वक़्त का तकाज़ा भी कश्मीर और कश्मीर को अपनाने का नही तो वो दूर होते रहेंगे और एक दिन ऐसा आएगा कश्मीर तो रहेगा पर कश्मीरी ना होंगे..

नोट – यह लेखक के निजी विचार है कोहराम न्यूज़ लेखक की कहीं किसी भी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता है.


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