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शहीद अफसर तंजील अहमद के जनाजे पर भारी भीड़ न जुटने के लिए कुछ सिरफिरे, इलाके के मुसलमानों को कोस रहे हैं. याकूब वगैरह की मिसाल दे रहे हैं.

क्या राष्ट्रीय मिशन पर शहीद होने वाले के लिए एकजुटता दिखाने का दायित्व केवल मुसलमानो पर है? सिर्फ इसलिए कि तंजील साहेब मुसलमान थे?

इलाका हिंदू बहुसंख्यक है. क्या शहीद के लिए उनका कोई दायित्व नहीं? क्या हिंदुओं को वहां नहीं जुटना चाहिए था… इसे ही तो राष्ट्रीय एकता कहते हैं.

इलाके के हिंदू, राष्ट्रीय एकता की परीक्षा में फेल हुए.

एक शहीद को आपलोगों ने सिर्फ मुसलमान बना दिया. मुसलमान होना एक शानदार पहचान है. लेकिन शहीद तो फिर पूरे देश का मान होता है

प्रधानमंत्री मोदी को करना चाहिए नेतृत्व

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NIA के ऑफिसर तंजील अहमद की हत्या एक राष्ट्रीय क्षति है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि इस मौके पर, धर्म की संकीर्ण दीवारों से ऊपर उठकर, राष्ट्रीय दुख में पूरे देश का नेतृत्व करें. इस शहादत को मतभेद भुलाने का मौका बनाएं. हत्याकांड की जांच शीघ्र पूरी हो. दोषियों को कड़ी सजा मिले.

प्रधानमंत्री किसी एक धर्म का प्रधानमंत्री नहीं होता. वह पूरे राष्ट्र का प्रधानमंत्री होता है. तमाम असहमतियों और विरोध के बावजूद, सच यही है.

प्रधानमंत्री देश का नेतृत्व करें.

बाबा साहब की वजह से बन गया एक चाय वाला प्रधानमंत्री

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मधु मिश्रा जी,

जो जूता साफ करते थे वे चमड़ी छीलना और उसे धूप में सुखाना भी जानते थे. इसलिए, देश के 85% मेहनतकश लोगों के बारे में संभलकर बोला कीजिए. निठल्ले नहीं हैं ये. आपकी तरह.

यह सच है कि बाबा साहेब के संविधान की वजह से लोकतंत्र में वह देश का भाग्य विधाता है. संविधान ने उसे बराबरी दी है.

और हां, जहां वह जूते साफ करता था, वहीं बगल में एक बच्चा चाय बेचता था. उसका कहना है कि बाबा साहेब की वजह से ही वह आज देश का प्रधानमंत्री है.

मिश्रा जी, महिलाओं का संपत्ति का अधिकार भी संविधान से आया है. वरना मनु ने तो क्या दुर्गति कर रखी थी.

समझ रही हैं न आप?

अलीगढ़ में उस दिन परशुराम सेवा संस्थान का ब्राह्मण सम्मेलन नहीं, दरअसल खाप पंचायत की बैठक चल रही थी.

सांसद समेत जाति के लगभग हजार लोगों की उपस्थिति में बीजेपी की सीनियर नेता मधु मिश्रा ने जूते साफ करने वाली नस्लवादी टिप्पणियां की. वहां एक आदमी ने उठकर नहीं कहा कि आप देश को तोड़ने वाली हरकत कर रही हैं. मत कीजिए ऐसी बात.

एक जाति के हजार लोगों में वहां एक भी विवेकवान नहीं था.

अलीगढ़ की ब्राह्मण बिरादरी के लिये यह सामूहिक शर्म का विषय है. सामूहिक विवेक की मृत्यु सामूहिक शर्म का कारण होना चाहिए.

दुश्मनों की ज़रुरत नही अपने ही काफी है

http://www.amarujala.com/

नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ संतरा नगरी नागपुर में एक बड़ी साजिश हो रही है. मोदी जी इधर बाबा साहेब की जय बोलते हैं, सावित्रीबाई फुले जयंती पर ट्विट करते हैं, रविदास जयंती पर मत्था टेकते हैं और दूसरी तरफ बटुक ब्रिगेड उनके के धरे पर गोबर कर देती है.

1. बिहार चुनाव से पहले भागवत आरक्षण का विरोध करने का आइडिया आता है.
2. हैदराबाद निगम चुनाव से पहले संघी ब्रिगेड रोहित वेमुला हत्याकांड कर देता है. और वहां की सबसे मजबूत पार्टी बीजेपी 150 सीट में सिर्फ 4 जीतती है.
3. अभी के विधानसभा चुनावों से पहले फड़नवीस ने भारत माता विवाद छेड़कर बीजेपी को हराने का इंतजाम कर दिया है.

और अब

4. मिश्रा जी ने यूपी में बीजेपी की धुलाई का इंतजाम कर दिया है.

यूपी में बीजेपी की हार के बाद नितिन गडकरी प्रधानमंत्री बनेंगे.

– ये टिप्पणीयां दिलीप मंडल की फेसबुक वाल से ली गयी है तथा कोहराम न्यूज़ ने इसे संकलित किया है 


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