डॉ. एजाज अहमद मिर्जा डीआरडीओ में जूनियर साईंटिस्ट थे, एजाज नाम के साथ साईंटिस्ट होना महंगा पड़ गया। कर्नाटक बैंगलूरू में हुए बम विस्फोट के आरोप में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन डीआरडीओ के एक जूनियर वैज्ञानिक एजाज अहमद मिर्जा को उठाकर जेल में डाल दिया था। बेगुनाह होने के बाद यह जूनियर वैज्ञानिक साल भर तक जेल में बंद रहा, ऊपर से डीआरडीओ ने एजाज को नौकरी से निकाल दिया। बावजूद इसके कि अभी तक उन पर आरोप तक तय नहीं हो पाये, एनआईए ने भी अपनी रिपोर्ट में एजाज को बेगुनाह पाया।

दो दिन पहले अमेरिका के अहमद ने घड़ी बनाई, अहमद ,सूडान मूल का अमेरिकी मुस्लिम है जो टेक्सास में रहता है. इस 14 वर्षीय छात्र ने एक घड़ी बनाई थी जिसे बम समझकर स्कूल टीचर ने उसे गिरफ्तार करा दिया, अहमद की गिरफ्तारी के बाद उसकी दो बहनों ने ट्विटर पर ‪#‎Istandwithahmed‬ हैश टैग शुरू किया जिसे सिर्फ चार घंटे में लोगों ने इतना प्रचारित किया की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तक को उसके पक्ष में ट्विट करना पड़ा. ओबामा के बाद गूगल,नासा,हिलेरी क्लिंटन यहाँ तक की फेसबुक के मालिक जुकरबर्ग तक उसके साथ खड़े दिखें.


अब सवाल भारतीय लोकतंत्र की तरफ उठता है जिसमें साल भर के अंदर दर्जन भर ‘अहमद’ बेगुनाह होते भी जेल में सड़ाये जाते हैं, अदालत से बाइज्जत बरी होने के बाद क्या किसी नेता, किसी मुख्यमंत्री, मंत्री, प्रधानमंत्री, महामहिम ने एसे बेगुनाहों से मिलने की कोशिश की ? नहीं.. उल्टे जो इन बेगुनाहों की लड़ाई लड़ते हैं उन्हें, गद्दार, नक्सली, आतंकवाद का समर्थक तक कहा जाता है, कचहरी परिसर में उन पर दक्षिणपंथियों द्वारा हमले किये जाते हैं, इनके वकील अपने मुवक्किल के सामने ही बेइज्जत किये जाते हैं।

अमेरिका का वह छात्र महज 14 वर्ष का है जिसे शक के आधार पर जेल भेज दिया गया, मगर भारत का एजाज अहमद मिर्जा जूनियर साईंटिस्ट था जिसे उठाकर जेल में ठूंस दिया गया। कहीं से आवाज नहीं आई थी कि आई स्टैंड विद एजाज मिर्जा, अमेरिका के कमसे कम इस एक कदम की तो तारीफ करनी ही चाहिये कि उसने अपनी गलती स्वीकार करने में एक पल नहीं लगया। मगर क्या विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के पुजारी भी अपनी गलतियों को सुधारेंगे ? सवाल भारतीय लोकतंत्र से है, सवाल न्यायपालिका, पुलिस, मीडिया से है। दर्जन भर से ज्यादा एसे अहमद हैं जो इंजीनियर और डॉक्टर बनने की राह पर थे मगर पूर्वाग्रह से ग्रस्त खाकी ने उन्हें आतंकवादी बना डाला, और फिर सबकुछ तबाह हो गया, डॉक्टर इंजीनियर बनने का ख्वाब भी, ख्वाब टूटना, उम्मीदों का बिखरना बहुत खरनाक होता है, और एसी खतरनाक बीमारियों से दर्जन भर छात्र ग्रस्त हैं जो सिर्फ ‘अहमद’ होने की दस, पंद्रह, बारह साल सजा भुगत कर आये हैं, सबकुछ लुटा देने के बाद।
‪#‎_I_Satnd_With_Indian_Ahmed‬

वसीम अकरम त्यागी
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लेखक जाने में समाजसेवी और वरिष्ठ पत्रकार है


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