माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने आज कहा कि वह अगस्त में अपना दूसरा कार्यकाल खत्म होने के बाद फिर से राज्यसभा के लिये लिये चुनाव नहीं लड़ेंगे । येचुरी ने कहा कि वह एक और कार्यकाल नहीं मांगेंगे क्योंकि पार्टी का मानदंड किसी नेता को दो से अधिक बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने की अनुमति नहीं देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी पार्टी का मानदंड है। इसलिए, मैं तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ूंगा। पार्टी महासचिव के तौर पर मुझे इस बात को सुनिश्चित करना है कि मानदंड का पालन हो।’’ वाम दलों में सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने पेशकश की थी कि अगर येचुरी पश्चिम बंगाल से चुनाव लड़ते हैं तो माकपा महासचिव के दोबारा निर्वाचन के लिए वह समर्थन देगी। येचुरी को राज्यसभा में विपक्ष की ओर से अच्छे वक्ताओं में से एक माना जाता है।

चिर प्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस के हाथों माकपा को 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। माकपा के राज्य विधानसभा में सिर्फ 26 विधायक हैं। माकपा के पास इतने विधायक नहीं हैं कि वह येचुरी या किसी अन्य नेता को राज्य से अपने दम पर राज्यसभा भेज सके।

कांग्रेस के राज्य विधानसभा में 44 विधायक हैं और उसका समर्थन येचुरी के लिए एक और कार्यकाल सुनिश्चित कर सकता था। पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि किसी नेता को दो से अधिक बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित नहीं करने की प्रथा एक मानदंड है और जरूरत पड़ने पर पार्टी इसके विपरीत फैसला कर सकती है।

सूत्र ने कहा, ‘‘पार्टी के मानदंड का लक्ष्य पार्टी के भीतर युवा नेताओं को प्रोत्साहित करना है। हालांकि, यह सिर्फ एक मानदंड है और यह अनिवार्य नहीं है। माकपा सामूहिक फैसला करने में विश्वास करती है। इसलिए, उसे सिर्फ इस सिलसिले में फैसला करना है।’’


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