ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने निर्भया और बिलकिस बानो के मामले में दोषियों को मिली सज़ा पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों मामलों की सज़ा में दोहरा मापदंड हैं. 2002 में बिलकिस बानो के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मृत्य दंड दिया जाना चाहिए.

ओवैसी ने कहा कि गुजरात दंगों के दौरान मार्च 2002 में गर्भवती बिलकिस बानो के साथ दुष्कर्म करने के साथ-साथ आरोपियों ने उसकी मासूम बेटी का सिर पत्थर से दे मारा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. दंगाइयों ने बिलकिस बाने की बहन, मां और परिवार के 11 अन्य सदस्यों की भी हत्या कर दी थी. उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए.

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ओवैसी ने कहा कि हालांकि वह उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन जानना चाहते हैं कि मृत्युदंड देने के मामले में ‘दोहरा मापदंड’ क्यों है? उन्होंने कहा कि उन्होंने याकूब मेमन को मृत्युदंड दिए जाने के अदालत के फैसले का भी समर्थन किया था, हालांकि यह हर कोई जानता है कि 1993 के मुंबई बम विस्फोट में उसकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर संलिप्तता नहीं थी, पर अदालत को उसके खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्य मिले थे.

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उन्होंने कहा कि गुजरात में जब बिलकिस बानो के साथ दुष्कर्म हुआ और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या की गई, नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे.

उन्होंने कहा कि चूंकि उनकी सरकार ने इस मामले में उचित जांच नहीं करवाई, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को सीबीआई को सौंप दिया. उन्होंने कहा कि मैं मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली मोदी सरकार से जानना चाहता हूं कि क्या वो बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेगी, ताकि दोषियों को मृत्युदंड मिल सके.

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