केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रोहिंग्‍या मुस्लिमों को देश से निकाले जाने के फैसले की आलोचना करते हुए आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा सवाल उठाया है.

उन्होंने कहा कि जब देश में तिब्‍बती शरणार्थी तौर पर रह सकते हैं तो रोहिंग्‍या मुस्लिम क्‍यों नहीं रह सकते ? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि जब तसलीमा नसरीन देश में रह सकती है तो रोहिंग्‍या मुस्‍लि‍म क्‍यों नहीं रह सकते. जब तस्‍लीमा आपकी बहन बन गई तो ये रोहिंग्‍या आपके भाई क्‍यों नहीं बन सकते.

औवेसी ने कहा, आपकी हुकूमत कहती है कि हम तमाम रोहिंग्‍या को वापस भेज देंगे. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि किस कानून के तहत उन्‍हें भेजेंगे. आप संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत की स्‍थायी सदस्‍यता चाहते हैं तो क्‍या ये आपका मिजाज होगा कि जो यूएन की ओर से शरणार्थी के रूप में दर्ज हैं, उन्‍हें आप बाहर भेज देंगे.

औवेसी ने तम‍िल शरणार्थ‍ियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्‍या तमिलनाडु में 65 हजार तमिल शरणार्थी नहीं हैं. अगर ये सच नहीं है तो मुझे करेक्‍ट कीजिए. जब उन शरणार्थियों के बारे में रिपोर्ट आई थी कि वह दहशतगर्दी में लिप्‍त हैं, तो उनके साथ क्‍या किया गया था. उन्‍हें एक कैंप से निकालकर दूसरे कैंप में भेज दिया गया था. उन्‍हें वापस क्‍यों नहीं भेजा गया.

क्‍या हमारे देश में बांग्‍लादेश से चकमा लोग नहीं आए. ये लोग आज भी अरुणाचल में रहते हैं. हमने 1 लाख 40 हजार तिब्‍ब‍तियों को अपना दोस्‍त माना. दलाई लामा को अपना दोस्‍त माना. जम्‍मू में आज भी पाकिस्‍तान से लोग आते हैं.


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