Varun Gandhi

उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर से लोकसभा सांसद वरुण गांधी ने शुक्रवार को एक बार फिर से ‘राइट टू रिकॉल’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनता को ‘राइट टू रिकॉल’ का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने इस सबंध में निजी तौर पर संसद में विधेयक भी पेश करने की भी बात कही.

इस दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना कठिन नहीं है. लोगों को राइट टू रिकॉल मिलना चाहिए और मैं इस विधेयक को (निजी विधेयक के तौर पर) संसद में पेश करूंगा ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि लोग अपने प्रतिनिधियों से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में उन्हें हटा सकें.

बीजेपी सांसद ने बताया कि ब्रिटेन में मतदाता सरकार को सामूहिक याचिका सौंपकर और अगर एक लाख से ज्यादा हस्ताक्षर मिलते हैं तो संसद में निर्वाचित प्रतिनिधि की जवाबदेही पर चर्चा की शुरुआत की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि हाल में उनके संसदीय क्षेत्र में जिला परिषद के चुनाव हुए और उन्होंने सुनिश्चित किया कि प्रतिभावान लोगों को चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए और उनमें से अधिकतर ने जीत हासिल की. उन्होंने कहा कि अगर वह ‘गांधी’ नहीं होते तो 29 वर्ष की उम्र में उन्हें लोकसभा सांसद बनने का मौका नहीं मिलता.  इस तरह की संस्कृति व्यवसाय, क्रिकेट और फिल्मों में भी है और इसे खत्म किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि वह सांसदों का वेतन लगातार बढ़ने के खिलाफ हैं जो सांसद खुद ही बढ़ा लेते हैं. उन्होंने कहा कि सांसदों को खुद से अपना वेतन नहीं बढ़ाना चाहिए. वरुण ने कहा कि सांसद के रूप में वह अपना वेतन नहीं लेते और लोकसभा अध्यक्ष से कहा है कि इसे किसी गैर सरकारी संगठन या जरूरतमंद को दे दें.


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