मु़ख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखा और ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री का कम पढ़ा-लिखा होना कोई मुद्दा नहीं है। यद्यपि जालसाजी करना और कोई फर्जी डिग्री बनाना एक अपराध और विश्वासघात है वही दूसरी और त्रिनगर से विधायक तोमर ने एक आरटीआई आवेदन दायर करके मोदी के अंकपत्र सहित अन्य दस्तावेजों की मांग कर डाली। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पुलिस को प्रधानमंत्री को दिल्ली विश्वविद्यालय ले जाना चाहिए और उनसे वह हॉल दिखाने के लिए कहना चाहिए जहां वह परीक्षा में बैठे थे।
तोमर ने आश्चर्य जताते हुवे कहा कि प्रधानमंत्री उनके जैसे आरोपों का सामना कर रहे हैं लेकिन क्यों गिरफ्तार नहीं किया जा रहा हैं, यदि कानून के सामने सभी बराबर हैं। पार्टी ने साथ ही आशंका जतायी कि दिल्ली विश्वविद्यालय के रिकार्ड सुरक्षित नहीं हैं।

केजरीवाल ने कुलपति को लिखे अपने पत्र में मांग की कि मोदी की डिग्री को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर डाला जाए। केजरीवाल ने लिखा, यह अत्यंत गंभीर विषय है क्योंकि गुजरात विश्वविद्यालय का कहना है कि उन्होंने वहां से स्नातकोत्तर किया है। यदि उन्होंने बीए ही नहीं किया, तो उनको एमए में दाखिला कैसे मिल गया? इससे संदेह उत्पन्न होता है कि तब तो एमए की डिग्री फर्जी है।

दस्तावेजों के सुरक्षित न होने की खबरों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कुलपति से अनुरोध किया कि वह सभी दस्तावेजों की हिफाजत के लिए उचित कदम उठाएं और सारे दस्तावेज तुरंत वेबसाइट पर डाल दिए जाएं। उन्होंने लिखा, आपसे निवेदन है कि इन सभी दस्तावेजों की हिफाजत के लिए उचित कदम उठाएं। बेहतर होगा कि अगर ये सारे दस्तावेज तुरंत वेबसाइट पर डाल दिए जाएं। इस देश के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनके प्रधानमंत्री कितने पढ़े हुए हैं? और यदि प्रधानमंत्री की डिग्री पर इतने गंभीर आरोप लगते हैं तो सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।


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