नई दिल्‍ली। जेएनयू में अफजल गुरु के समर्थन और देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में तीन छात्र गिरफ्तार हो चुके हैं। संसद में भी इस मुद्दे पर बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। इस बीच कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने एक विवदित बयान दे दिया है।

एक अंग्रेजी चैनल को दिए इंटरव्‍यू में चिदंबरम ने कहा ‘मुझे लगता है अफजल की फांसी पर फैसला ठीक से नहीं हुआ। संसद पर हमले में उसकी भूमिका पर संशय है।’ संसद हमले के आरोपी को यूपीए के कार्यकाल में तीन साल पहले फांसी दे दी गई थी।

इतने सालों बाद जब देश में उसे लेकर माहौल फिर गरम है, ऐसे में चिदंबरम ने कहा है, ‘मुझे लगता है यह संभव था कि इस मामले पर एक इमानदार राय रखी जाती कि अफजल पर फैसला ठीक ढंग से नहीं किया गया और संसद पर हमले में उसकी भूमिका को लेकर गहरा संशय है।’ चिदंबरम ने यह बात उस सवाल के जवाब में कही जिसमें पूछा गया था कि क्‍या अफजल गुरु को फांसी देने के लिए कोर्ट सही निष्‍कर्ष पर पहुंची थी?

सवाल के जवाब में चिदंबरम ने आगे कहा, ‘सरकार में होने के चलते आप ऐसा नहीं कह सकते कि अदालत ने केस को लेकर गलत निर्णय लिया क्‍योंकि वो सरकार ही थी जिसने उसके खिलाफ केस लड़ा था। लेकिन, एक स्‍वतंत्र व्‍यक्ति इस पर अपनी राय रख सकता है कि केस का निर्णय ठीक से नहीं हुआ।’ इसके साथ ही चिदंबरम ने जेएनयू मामले पर इशारों में अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर कोई इस तरह की राय रखता है तो उसे देश विरोधी कहना गलत है।

मालूम हो कि 2008 से लेकर 2012 तक पी चिदंबरम गृह मंत्री थे जिसके बाद उन्‍हें वित्त मंत्री बना दिया गया था। अफजल गुरु को अदालत ने 2001 में संसद हमले का दोषी पाया था और 2013 में उसे फांसी हो गई थी उस समय सुशील कुमार शिंदे गृह मंत्री थे।

कांग्रेस नेता ने जेएनयू छात्रों के खिलाफ लगे देशद्रोह के आरोपों को लेकर कहा कि यह अपमानजक है और अदालत पहली सुनवाई में ही इन आरोपो को खारिज कर देगी। उन्‍होंने कहा, ‘स्‍वतंत्रता से बोलना देशद्रोह नहीं है। आपकी बातें तभी देशद्रोही होती हैं जब इनसे बारूद के ढेर में आग लग जाए।’

उन्‍होंने आगे कहा, ‘जेएनयू में लगाए गए नारे देशद्रोह नहीं है। इस उम्र में छात्रों को गलत होने का हक होता है और यूनिवर्सिटी ऐसी जगह है जहां आप हमेशा गंभीर नहीं हो सकते कई बार आप हास्‍यास्‍पद भी हो सकते हैं।’

जब चिदंबरम को यह कहा गया कि अफजल की फांसी तभी हुई थी जब उनकी सरकार थी तो उन्‍होंने कहा, ‘हां यह सच है लेकिन उस समय में गृह मंत्री नहीं था, ‘मैं नहीं कह सकता कि मैं उस समय क्‍या करता। निर्णय लेना तभी संभव है जब आप कुर्सी पर बैठे हों।’ (Naidunia)


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