नोटबंदी के बाद आतंकियों गतिविधियों के कम होने के रक्षा मंत्री मनोहर परिर्कर के दावों को खारिज करते हुए शिवसेना ने नोटबंदी के बाद शहीद हुए सैनिकों की वास्तविक संख्या जारी करने की मांग की हैं. साथ ही शिवसेना ने केंद्र पर सेना को राजनीति में घसीटे जाने पर आपति जाहिर की हैं.

मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में शिवसेना ने कहा है कि जम्मू के अखनूर सेक्टर में कल जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (जीआरईएफ) के शिविर पर हुआ हमला, यह साबित करता है कि नोटबंदी से आतंकी पस्त नहीं हुए हैं और उनकी आतंकी गतिविधियां बिना किसी रच्च्कावट के जारी है.

संपादकीय में कहा गया है, ‘‘आतंकवादी एक समय में सार्वजनिक स्थानों पर हमला किया करते थे लेकिन अब वे सीधे सैन्य शिविरों को निशाना बना रहे हैं और जवानों को मार रहे हैं. क्या इसे परिवर्तन के तौर पर देखा जाना चाहिए? आतंकी हमलों को नाकाम किये जाने को नोटबंदी के प्रमुख कारण के तौर पर उद्धत किया गया. लेकिन आतंकी हमलों की घटनाएं जारी हैं, यहां तक कि मणिपुर में भी कई स्थानों पर.’’

शिवसेना ने कहा कि ‘‘पिछले वर्ष 60 जवान शहीद हुए जबकि 2014 में 32 और 2015 में 33 जवान शहीद हुए थे. इसे पाकिस्तानियों पर लगाम लगाने का लक्षण कैसे माना जाए? किसी को भी सेना को राजनीतिक कीचड़ में नहीं खींचना चाहिए.’’


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