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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का फैसला सरकारी नहीं है. यह फैसला अदालत का हैं जिसे अदालत के आदेश पर लागू करने की कोशिश की जा रही हैं.

जेटली ने इस बारे में कहा कि संविधान हर व्यक्ति को समानता का अधिकार और गरिमा के साथ जीवन बिताने का अधिकार देता है. जहां तक पर्सनल लॉ का संबंध है, मेरा मानना है, पर्सनल लॉ के तहत मिले अधिकारों पर संवैधानिक नियंत्रण होना चाहिए. पर्सनल लॉ भेदभाव को बढ़ावा नहीं दे सकता और न ही मानवीय गरिमा के साथ समझौता कर सकता है.

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उन्होंने आगे कहा, पर्सनल लॉ के तहत मिले अधिकार धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं पर तो हावी हो सकते हैं, लेकिन यह किसी व्यक्ति के अधिकारों पर हावी नहीं हो सकते. उन्होंने कहा, पर्सनल लॉ में कई सरकारों ने संशोधन किया है. उन्होंने एनडीए सरकार द्वारा ईसाई धर्म के तलाक के कानूनों में संशोधन करने, मनमोहन सरकार द्वारा हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन करने का उदाहरण भी दिया.

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साथ ही उन्होंने कांग्रेस के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता पर कांग्रेस के स्टैंड पर उन्हें इसलिए भी हैरत होती है क्योंकि कांग्रेस के ही जवाहर लाल नेहरु और सरदार पटेल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड की परिकल्पना की थी.


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