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केरल के कोझीकोड मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मुसलमानों के सबंध में दिए गए बयान को लेकर सत्ता में उनकी सहयोगी पार्टी शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सवाल उठाते हुए पूछा कि आज अचानक मुसलमानों की याद क्यों आ गई ?

मोदी ने रविवार को कहा था कि मुसलमानों को ‘वोट की मंडी का माल’ न समझते हुए उन्हें अपना मान कर उनके उत्थान के लिये काम करने की जरूरत हैं. उन्होंने भाजपा की बैठक में कहा था कि वे ‘घृणा के पात्र नहीं’ हैं और न ही उन्हें ”वोट मंडी की वस्तु” के रूप में देखा जाना चाहिए बल्कि उनके साथ ‘अपनों’ की तरह से व्यवहार करना चाहिए.

उद्धव ठाकरे ने इस बारे में कहा कि सरकार बदल गई, फिर भी मुसलमानों की खुशामद का नया प्रयोग जारी है. सामना में आगे कहा गया कि मुसलमानों को वंदे मातरम का विरोध करना छोड़ना होगा जो वंदे मातरम का उद्घोष करेगा वह मुसलमान अपना ही है.

उद्धव के मुताबिक मुसलमानों को साथ लेकर राजनिति करनेवालों का एक नया बैंक बन गया है और इसके चलते राम मंदिर का कंगूरा उतरता हुआ दिखाई दे रहा है. मुसलमान इस देश का सर्वकालीन दुश्मन नहीं,लेकिन हिन्दुओं को उनके कारण ही हिन्दुस्तान मे सम्मान और अधिकार नहीं मिल रहा है.


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