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कश्मीर हिंसा को लेकर भारत सरकार के रुख से नाराज होकर इस्तीफा देने वाले पूर्व सांसद तारिक हमीद कर्रा को लेकर माकपा नेता मुहम्मद यूसुफ तारिगामी ने आज कहा कि उन्हें लोकसभा से इस्तीफा देने की बजाय कश्मीर का मुद्दा संसद में उठाना चाहिए था।

तारिगामी ने आगे कहा कि ‘कर्रा को कोई भी फैसला लेने का अधिकार है। हालांकि मैं अपनी बात उठाने के लिए कोई अवसर या मंच नहीं छोड़ता।’’ कर्रा को कश्मीर की स्थिति के बारे में संसद मे बोलना चाहिए था।

उरी आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के बारे में उन्होंने कहा कि टकराव के लिए यह कोई ‘‘बहाना’’ नहीं होना चाहिए क्योंकि सभी पक्षों के बीच बातचीत से ही कश्मीर मुद्दे का सौहाद्र्रपूर्ण हल निकल सकता है।

गौरतलब रहें कि कुलगाम के विधायक तारिगामी ने इस्तीफा देते वक्त कहा था कि, केंद्र और राज्य सरकार पर कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शन को काबू में करने के लिए अधिक बलप्रयोग कर रही है. सरकार जमीनी हालात को नजरअंदाज कर रही है और असंवेदनशील रवैया अपना रही है. इसलिए वे अपनी लोकसभा सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे है.


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