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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि घाना की राजधानी अक्रा स्थित एक विश्वविद्यालय में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को हटाने का घाना सरकार का निर्णय अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए केन्द्र सरकार से मांग की है कि इस मामलें में सरकार गंभीरता दिखाए.

उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति हटाने के मामले को अति गंभीरता से लेकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि बापू की प्रतिमा का किसी भी तरह से अनादर नहीं होने पाए. उन्होंने कहा कि यह सर्व विदित है कि महात्मा गांधी का पूरा जीवन हर तरह से अन्याय व अत्याचार के विरूद्व अहिंसात्मक संघर्ष के लिये समर्पित रहा है.

उन्होंने कहा कि एक ओर तो घाना सरकार यह बात स्वीकार कर रही है कि गांधी जी ने दुनिया भर में आजादी व नागरिक अधिकारों के लिये आंदोलन को प्रेरित किया. वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा जून 2016 में अनावरण किये गये उनकी प्रतिमा को हटाने का काम कर रही है.

गहलोत ने कहा कि देश-दुनिया में अरबों लोग महात्मा गांधी के कार्यो-विचारों के अनुयायी हैं एवं उन्हें अपना प्रेरणास्त्रोत मानते हैं. ऐसी स्थिति में घाना सरकार का यह निर्णय ऐसे लोगों की भावनाओं को भारी ठेस पहुंचाने वाली है. घाना सरकार को इस अविवेकपूर्ण निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए.

 


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