दिल्ली विश्वविद्यालय के बाहर प्रदर्शन के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने शनिवार को दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को समर्थन देने का वादा किया था. भाजपा नेता ने शनिवार को कहा कि अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का निर्माण सिर्फ तयशुदा स्थान पर ही होगा. साथ ही उन्‍होंने कहा कि कोई भी कार्य बलपूर्वक या कानून के खिलाफ नहीं किया जाएगा.

स्वामी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हमारी संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए जरूरी है और जब तक इसका निर्माण नहीं होता है तब तक हम इसे नहीं छोड़ेंगे. लेकिन कोई कार्य बलपूर्वक और कानून के खिलाफ नहीं किया जाएगा. हमें पूरा विश्वास है कि अदालत में हम जीतेंगे. उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को समर्थन देने का वादा किया था. स्वामी ने कांग्रेस से अपील की कि वे इसके समर्थन में आगे आएं.

उन्‍होंने कहा कि राजीव गांधी ने निजी तौर पर उनसे कहा था कि राम मंदिर का निर्माण होगा और जब भी उन्हें मौका मिलेगा, वह इसमें मदद करेंगे और पार्टी के विरोध के बावजूद उन्होंने जो पहली मदद की, वह टेलीविजन पर रामायण का प्रसारण शुरू करने का था. उन्होंने कहा था कि वे आधारशिला रखने की भी अनुमति देंगे. 1989 में अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने कहा था कि देश में राम राज्य आना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस आगे आएगी और समर्थन करेगी क्योंकि यह केवल हमारी मांग नहीं बल्कि देश की मांग है.

स्वामी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘राम जन्म भूमि मंदिर : मौजूदा परिदृश्य’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर विवादित स्थल पर बनेगा और मस्जिद निर्माण के लिए अलग भूमि आवंटित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हम सरयू नदी के पार एक मस्जिद निर्मित करेंगे, लेकिन राम मंदिर तयशुदा स्थान पर ही निर्मित होगा.

संगोष्ठी का आयोजन अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ द्वारा किया गया. इस पीठ की स्थापना दिवंगत विहिप नेता अशोक सिंघल ने की थी. विभिन्न विद्यार्थी समूहों के 100 से अधिक लोगों ने इस आयोजन के खिलाफ प्रदर्शन किया.

संगोष्ठी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले संगठनों में आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई), आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ), क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) और पिंजरा तोड़ समूह जैसे विद्यार्थियों के संगठन शामिल थे.

किरोड़ीमल कॉलेज के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि इस तरह का कोई आयोजन विद्यार्थियों की भावना भड़काने और उनके विचारों का ध्रुवीकरण का एक प्रयास है.

भाजपा नेता के इस बयान पर कांग्रेस नेता शकील अहमद ने कहा कि स्वामी के बयान को कोई भी गंभीरता से नहीं लेगा, क्योंकि उन्होंने जो भी कहा, उस पर कभी खरा नहीं उतरे, और आज राम मंदिर पर बयान देने के पीछे उनका एक निजी हित है. कांग्रेस महासचिव अहमद ने इस पर कहा कि स्वामी का पिछला इतिहास अच्छा नहीं रहा है, क्योंकि वह जो कहते हैं, उसे कभी नहीं करते.

कांग्रेस नेता ने कहा कि वह सभी मुद्दों पर टिप्पणी करते रहे हैं. वह सिर्फ अपने लिए राज्यसभा सीट सुनिश्चित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं. अहमद ने कहा कि उन्होंने स्वामी से व्यक्तिगत तौर पर कहा कि वह राज्यसभा की सीट हासिल करने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

अहमद ने कहा कि हम एक टीवी चैनल पर एक बहस में हिस्सा ले रहे थे. मैंने उनसे कहा कि उन्हें सिर्फ राज्यसभा की एक सीट के लिए ये सब कार्य बंद कर देना चाहिए. कांग्रेस नेता ने कहा कि उसके बाद स्वामी हंसे और उसके बाद उन्होंने कुछ नहीं कहा. साभार: न्यूज़ 18


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