मुंबई | भले ही शिवसेना, केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में बीजेपी की सहयोगी हो लेकिन इन दोनों ही सरकार पर हमला करने वो कोई भी मौका नही छोड़ते. अभी महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में किसानो ने बड़ा आन्दोलन छेड़ा हुआ है जिसकी वजह से विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा लग गया है. इसी मुद्दे को आधार बनाकर शिवसेना ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. शिवसेना ने मोदी सरकार से कहा है की वो किसानो को महज वोट बैंक समझाने की गलती न करे.

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे एक लेख में कहा गया है की कई साल बाद , पिछले साल का मानसून किसानो के लिए रहत लेकर आया और फसलो का भारी उत्पादन हुआ. लेकिन मोदी सरकार के नोट बंदी के चाबुक ने किसानो को अपनी फसल मिटटी के मोल बेचने पर मजबूर कर दिया. यहाँ तक किसानो को उनकी लागत भी नही मिली पाई जिसकी वजह से किसान और कर्ज तले दब गया.

शिवसेना ने मोदी सरकार को उनका वादा याद दिलाते हुए कहा की आप कृषि क्षेत्र में विकास करने के दावे के साथ सरकार में आये थे लेकिन अब आप उन्हें कृषि पर टैक्स लगाने की धमकी देकर उनको डराते है. ऐसे में जब उधोग जगत और सेवा क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया जा रहा है , तब मोदी सरकार कृषि क्षेत्र के प्रति बेपरवाह नजर आ रही है. शिवसेना ने बीजेपी को चेताते हुए कहा की किसानो को केवल वोट बैंक न समझे.

लेख में कहा गया की पंचायत से लेकर नगर निगम के चुनाव जीतना आसान है क्योकि अगर आपके पास पैसा है तो आप चाँद पर भी चुनाव जीत सकते है. लेकिन इसका मतलब यह नही की जनता आपकी नौकर है. किसानो की भावनाओ को समझो , वो केवल वोट बैंक नही है. अगर आप अपने चुनाव प्रचार पर सैकड़ो करोड़ रूपए खर्च कर सकते हो तो किसानो के कर्ज माफ़ करने में क्यों हिचकिचा रहे हो. शिवसेना ने क्रूड आयल के दाम गिरने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दामो में कमी न करने पर भी सवाल खड़े किये. उन्होने कहा तीन साल हो गए लेकिन कहाँ है अच्छे दिन?


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