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केंद्र और महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सहयोगी शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गौरक्षकों के खिलाफ दिए गए बयान का समर्थन किया हैं. साथ ही सवाल उठाते हुए पूछा कि गौरक्षा के गोरखधंधे के लिए जिम्मेदार कौन है ?

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में पूछा कि पिछले दो सालों में इतने गौरक्षक कहां से आए हैं ? साथ ही सामना में बीजेपी पर भी उंगली उठाते हुए कहा गया कि ‘भारतीय जनता पार्टी के प्रचार का झंडा लेकर चलने वाले संगठनों की गौरक्षा के नाम पर सैकड़ों संस्थाएं थी.’ ऐसे में ‘क्या यही लोग आज गोरक्षा का गौरखधंधा तो नहीं कर रहे.’

सामना में आगे कहा गया कि  जिस समाज में वृद्ध माता पिता को वृद्धाश्रम में ढकेल दिया जाता है , लड़कियों की गर्भ में हत्या कर दी जाती है, उस देश में गौ हत्या और गोरक्षा के नाम पर हिंसाचार होता है. लेकिन हमारे जैसे लोगों के मन में एक सवाल उठता है की आखिर एक दो साल में इतनी बड़ी संख्या में गौरक्षक कैसे निर्माण हो गए कांग्रेस के शासन काल में इनकी आवाज इतनी कम होती थी की गोवंश हत्या बंदी कानून बनने की सम्भावना भी नहीं थी.

लेकिन बीजेपी के प्रचार का झंडा लेकर जो संस्थाएं और संगठन आये उसमें गौरक्षा की सैकड़ों संस्थाएं थी और यही लोग आज गोरक्षा का गोरखधंधा कर रहे हैं ऐसा सरकार को लग रहा है क्या ? गौरक्षा के नाम पर ट्रकों को रोक कर पैसा वसूलना और फिर बाद में उन्हीं गायों का सौदा यह भयानक धंधा है.

सेना ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि ‘प्रधानमंत्रियों को चाहिए कि इन शाकाहारियों पर भी कठोर प्रहार करके उन्हें रास्ते पर लाएं. कोई क्या खाए यह उसका अपना मसला है.’


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