पटना : राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा है कि पूर्व उप मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के एक तर्कपूर्ण बयान ने आरएसएस के हाफ पैंट को फूल पैंट करने पर मजबूर कर दिया. सोमवार को ट्वीट कर उन्होंने कहा है कि आरएसएस है कौन, जो आरक्षण पर बयान जारी करे.
यह संगठन किस हैसियत से आरक्षण पर चर्चा कर रहा है. राजद प्रमुख ने कहा है कि आरएसएस आरक्षण खत्म करने की आड़ में बाबा साहेब के संविधान की बजाय गुरु गोलवलकर का संविधान लागू करना चाहता है, ताकि छोटी जाति के लोग पढ़ नहीं सके, बढ़ नहीं सके, नौकरी नहीं कर सके, मंदिरों में प्रवेश नहीं कर सके और हर जगह इनका ही वर्चस्व कायम रहे.
उन्होंने कहा कि आरएसएस गुरु गोलवलकर के बंच ऑफ थॉट में लिखे हुए दबे, कुचले और वंचितों को तिरस्कार एवं शोषण करने के तरीकों को लागू करना चाहता है. उन्होंने कहा है कि पूरा देश जानता है कि केंद्र सरकार के आरएसएस और गुरु गोलवलकर की नीतियों पर चलने के कारण ही हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला की मौत हुई.
बंच आफ थॉट पुस्तक में लिखी बातों को ही आरएसएस अपना संविधान मानता है और उसे लागू करना ही इनका असली एजेंडा है. ये लोग बाबा साहब के संविधान को कागज का एक टुकड़ा मानते हैं. अब ये पहचान चुके हैं कि इस देश का दलित, पिछड़ा और उत्पीड़ित समाज जाग चुका है. इसलिए बाबा साहेब की दिखावटी आड़ लेकर गुरु गोलवलकर का खतरनाक एजेंडा गुप्त रूप से लागू करना चाहते हैं.
दल्लिी और बिहार में भाजपा की मिली हार, आगामी चुनावों में संभावित हार और चुनावी वायदे पूरा नहीं करने के कारण आरएसएस व भाजपा के लोग हताशा और निराशा में अनाप-शनाप बोल रहे हैं. विकास के मुद्दों और विफलताओं से से ध्यान भटकाने के लिए ये लोग नये स्वांग रचते हैं. बिहार की जनता ने जो कड़ा सबक इनको सिखाया है उसका संदेश पूरे देश में गया है. उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर आरएसएस का सपना, सपना ही रहेगा. अब पता नहीं ये खुशफहमी के शिकार है या गलतफहमी के. इनके वेष बदलने से कुछ नहीं होगा. (prabhatkhabar)

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