नई दिल्ली | कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी की विफलताए कांग्रेस के लिए मुसीबत का सबब बन रही है. हाल ही में हुए कई चुनावो में कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी है जिसकी वजह से पार्टी के अन्दर ही राहुल के खिलाफ आवाजे उठनी लगी है. कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है की प्रधानमंत्री मोदी के मुकाबले राहुल गाँधी की लोकप्रियता काफी कम है. फ़िलहाल राहुल , मोदी के विकल्प के तौर पर उभरते हुए नही दिख रहे है.

यही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की चिंता का भी विषय है. इसलिए आगामी लोकसभा चुनावो में मोदी को चुनौती देने के लिए पार्टी अब किसी दुसरे चेहरे को आगे करने के मूड में है. क्योकि यह बात सोनिया गाँधी भी समझ चुकी है की मोदी को हारने के लिए बेटे के भविष्य की कुर्बानी देनी होगी.  न्यूज़ 18 की खबर के अनुसार पार्टी में अब पुराने और वरिष्ठ नेताओ को बड़ी जिम्मेदारिया देने का फैसला किया गया है.

इसी वजह से कांग्रेस में हाल के दिनों में काफी बड़े रणनीतिक बदलाव देखने को मिले है. कुछ वरिष्ठ नेताओं जैसे गुलाब नबी आजाद, पी चिदम्बरम , आनंद शर्मा जैसे नेताओं के कद को और बड़ा किया गया है. इसके अलावा 13 जुलाई को कांग्रेस की और से नयी कम्युनिकेशन कमिटी का भी गठन किया गया जिसमे पुराने नेताओं को ही तरजीह दी गयी.

मोदी को आगामी लोकसभा चुनावो में कड़ी चुनौती देने के लिए सोनिया गाँधी ने एक बार कांग्रेस की कमान संभाल ली है. राष्ट्रपति उम्मीदवार को भी राहुल गाँधी की मौजूदगी के बिना तय कर लिया गया. दरअसल यह कांग्रेस को भी पता है की बिना क्षेत्रीय पार्टियों के वो मोदी को चुनौती नही दे पाएंगे. जबकि कई क्षेत्रीय पार्टिया अभी भी राहुल गाँधी के नाम पर सहमत नही है. क्योकि वो मानते है की राहुल गाँधी की लोकप्रियता मोदी के मुकाबले काफी कम है.


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