मंदसौर | मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसान आन्दोलन के हिंसक हो जाने के बाद वहां की स्थति और गंभीर हो गयी है. मंगलवार को पुलिस की गोलीबारी में 5 किसानो के मारे जाने के बाद आंदोलनकारियो ने बुधवार को कई निजी और सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया. फ़िलहाल राज्यसरकार ने मामले में कार्यवाही करते हुए मंदसौर के डीएम स्वतंत्र कुमार सिंह और एसपी ओपी त्रिपाठी को हटा दिया है.

वही अब इस मुद्दे ने राजनितिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने बुधवर को घोषणा की थी की वो गुरुवार को मंदसौर जायेंगे और आन्दोलनरत किसानो से मिलने. लेकिन जिला प्रशासन ने राहुल गाँधी को इसकी इजाजत नही दी. फिर भी मंदसौर जाने की जिद पर अड़े राहुल ने सड़क के रास्ते वहां जाने का फैसला किया. मिली जानकारी के अनुसार राहुल , उदयपुर होते हुए मंदसौर के लिए निकल चुके है.

उधर प्रशासन ने इस पर एतराज जताते हुए कहा की हम किसी भी सूरत में राहुल गाँधी को मंदसौर नही जाने देंगे. हम उन्हें नयागाँव में ही रोक देंगे. अगर वो फिर भी जिद पर अड़े रहे तो मजबूरन हमें उन्हें गिरफ्तार करना होगा. बताते चले की मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के किसान, कर्जमाफी और फसलो के उचित दाम की मांग को लेकर पीछले एक हफ्ते से आन्दोलन कर रहे है. जहाँ महाराष्ट्र में यह आन्दोलन शांतिपूर्वक चल रहा है वही मध्यप्रदेश में इसने हिंसा का रूप ले लिया.

मध्यप्रदेश में पुलिस गोलीबारी में 5 किसानो के मारे जाने के बाद विपक्षी पार्टियों ने केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की शिवराज सरकार को घेरना शुरू कर दिया. बुधवार को राहुल गाँधी ने इसे किसानो के खिलाफ युद्द बताया तो आम आदमी पार्टी ने भी 10 तारीख से किसानो के लिए आन्दोलन करने की बात कही. दरअसल आगामी लोकसभा चुनावो से पहले कई राज्यों में चुनाव है. इसलिए मंदसौर की घटना ने विपक्ष को बैठे बिठाये के एक मुद्दा दे दिया है. फ़िलहाल विपक्ष को लग रहा है की आने वाले चुनावो में यह मुद्दा उनकी नैया पार लगा सकता है.


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