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नई दिल्ली | भारत के सभी मीडिया चैनल और अखबारों में केवल एक ही चर्चा जोरो पर है. प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 का नोट बैन कर दिया है. इससे देश भर में अफरा तफरी का माहौल है. कालेधन और भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में उठाये गए इस कदम से कितना काला धन बाहर होगा, कितना भ्रष्टाचार कम होगा, यह तो समय ही बतायेगा लेकिन इस फैसले देश का हर वर्ग परेशानी का सामना कर रहा है.

इसी परेशानी को देखते हुए कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने मोदी सरकार के इस फैसले पर सवाल खड़े किये है. चिदंबरम ने कहा की मोदी सरकार के इस फैसले से कालेधन पर कोई असर नही होगा. बल्कि इससे देश में और काला धन बढेगा क्योकि काला धन केवल कैश की के रूप में ही नही होता. कुछ ऐसा ही कदम साल 1978 में मोरारजी देसाई ने भी उठाया था लेकिन वह कदम भी नाकाम साबित हुआ था.

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पी चिदम्बरम ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की देश में करीब 86 फीसदी 500 और 1000 के नोट है. इन सबको बदल कर नए नोट जारी करने में करीब 15 से 20 हजार करोड़ रूपए का खर्चा आएगा. अगर सरकार के इस कदम से इतनी रकम भी प्राप्त नही होती है तो सरकार का यह कदम भी नाकाम ही माना जायेगा. इसके अलावा जो लोग इस फैसले की वजह से परेशान हो रहे है, सरकार को उनका ख्याल रखना चाहिए था.

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2000 के नोट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चिदम्बरम ने कहा की अगर आप कालेधन के खिलाफ मुहीम चला रहे है तो फिर 2000 का नोट जारी करना एक हैरानी भरा फैसला है. इससे कैसे कालाधन रुकेगा? इससे देश में कालेधन का सर्कुलेशन और बढ़ जाएगा. इससे क्या फायदा होगा यह हमें समझ नही आ रहा है. उधर खबर है की देश भर में लोग कैश के बदल सोना खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे है जिसकी वजह से सोने का दाम ,12 घंटे के अन्दर ही 4000 रूपए/ तौला बढ़ गया.

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