आल इंडिया मजलिस ए इतेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कथित गौरक्षकों के बारें में दिए गए बयान पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं क्या उस पर वो काम भी करेंगे ?

उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए पूछा क्या सिर्फ़ शब्दों से काम चल सकता है ? जब अखलाक़ को मारा गया तो प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोले, जब दो मुसलमानों को झारखण्ड में मार दिया गया और जम्मू में एक ट्रक ड्राईवर को मारा गया, मोदी ख़ामोश रहे लेकिन अब मोदी ने चुप्पी तोड़ी है.

उन्होंने आगे कहा कि गुजरात के उना जिले में हुई दलितों के साथ ज़लील हरकत ने सेक्युलर लोगों को एक कर दिया है और शायद इसी भय की वजह से वो बोलने पर मजबूर हुए हैं. ओवैसी ने कहा कि दलितों और मुसलमानों के साथ अत्याचार वहीँ हो रहे हैं जहां पर बीजेपी की सरकार है या फिर इनका संगठन मज़बूत है.

उन्होंने ये भी कहा कि गौ-रक्षकों के सभी समूह किसी ना किसी तरह संघ परिवार से सम्बद्ध हैं. ओवैसी ने कहा कि महाराष्ट्र, झारखण्ड और हरयाणा जैसे राज्यों में जहाँ पर बीजेपी की सरकारें हैं वहाँ पर किसी की माँ की हिफ़ाज़त के लिए उतने सख्त क़ानून नहीं हैं जितने गाय की हिफ़ाज़त के लिए हैं. “इन राज्यों में किसी की माँ को परेशान करने पर सात साल की सज़ा नहीं है लेकिन गाय को परेशान करने पर सात साल की सज़ा है”


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