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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवेसी ने सुप्रीम कोर्ट के देश भर के सिनेमाघरों को फिल्म की शुरूआत से पहले राष्ट्रगान बजाए जाने के फैसले का स्वागत किया हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने सवाल भी किया कि क्या इससे देशभक्ति की भावना मजबूत करने में मदद मिलेगी?

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किसी को आपत्ति नहीं है, इस पर अमल होना चाहिए लेकिन सवाल ये है कि क्या आप ऐसा करके किसी व्यक्ति को देशभक्त बना सकते हैं. ओवैसी ने आगे कहा कि आप राष्ट्रवादी हो सकते हैं लेकिन अहम ये है कि क्या आप देशभक्त हैं? ओवैसी ने आरोप लगाया कि ये सरकार अति-राष्ट्रवादियों की है. जो उनके साथ सहमत नहीं होता, वो उनकी नजर में देशद्रोही है.

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संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ओवैसी ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान का अपमान रोकथाम कानून, 1971 और राष्ट्रगान के बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय का परामर्श नागरिकों से यह नहीं कहता कि राष्ट्रगान के वक्त खड़े होना जरूरी है. ओवैसी ने सरकार को सुझाव दिया कि वह कानून में संशोधन कर परामर्श का पुनरीक्षण करे.

ओवैसी ने आगे कहा कि जो व्यक्ति खड़े होकर राष्ट्रगान नहीं गा सकता, शारीरिक तौर से फिट नहीं है या अगर कोई बीमार है तो उनका क्या होगा? ओवेसी ने कहा, ‘ये तमाम सवाल है जिन को देखना पड़ेगा. गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में और 1971 के एक्ट में यह कहीं नहीं लिखा गया है कि सब को खड़े होकर राष्ट्र गान गाना ही पड़ेगा.’

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