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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी का विपक्ष को कालेधन का संरक्षक बताना उनके लिए मुसीबत बन गया है. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए संसद की कार्यवाही नही चलने दी. विपक्ष लगातार मोदी से संसद में मौजूद रहने और माफ़ी मांगने की माग पर अडा है. मोदी के बयान पर सभी राजनितिक दलों के नेताओ ने राज्यसभा में हंगामा किया जिसकी वजह से राज्यसभा कुछ देर के लिए स्थगित कर दी गयी.

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को पार्लियामेंट अवेन्यु में ‘भारत का संविधान’ नामक किताब का विमोचन करते हुए कहा था की विपक्ष इसलिए नोट बंदी का विरोध कर रहे है क्योकि उनको तैयारी का मौका नही मिला. अगर उनको 72 घंटे भी मिल जाते तो वो अपना काम कर जाते. मोदी का यह बयान विपक्ष को नागवार गुजरा है. विपक्ष ने संसद की कार्यवाही शुरू होते ही पीएम मोदी से माफ़ी की मांग करने लगा.

संसद के दोनों सदनों, राज्यसभा और लोकसभा में विपक्ष ने संसद की कार्यवाही नही चलने दी. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा की प्रधानमंत्री जी पुरे विपक्ष को कालेधन का समर्थक बता रहे है जो शर्मसार करने वाला है. यह लोकतंत्र के लिए सही नही है. इसके लिए मोदी जी को माफ़ी मांगनी चाहिए. संसद तब तक नही चलेगी जब तक प्रधानमंत्री मोदी संसद में नही आयेंगे.

गुलाम नबी आजाद के अलावा , बसपा प्रमुख मायावती, जेडीयु नेता शरद यादव, सपा नेता रामगोपाल यादव और टीएम्सी नेता डेरेक ओब्रायन ने भी राज्यसभा में मोदी के बयान की आलोचना की. इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री माफ़ी मांगे , के नारे भी गूंजते रहे. पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एक दिख रहा है. मोदी का यह बयान उनके गले की फांस बन सकता है. विपक्ष को बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया है. इसलिए आने वाले दिनों में भी संसद चलने में संसय दिख रहा है.


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