नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘मैनेजमेंट कोटा’ खत्म करने के आप सरकार सरकार के आदेश पर आज रोक लगाते हुए कहा कि यह फैसला कानूनी प्राधिकार के बगैर लिया गया. इसने 11 अन्य दाखिला अर्हता के बारे में दिल्ली सरकार के छह जनवरी के आदेश पर भी रोग लगा दी है. इनमें अपने बच्चों के दाखिले के दौरान माता पिता की पृष्ठभूमि, संगीत और खेल जैसे मुद्दे भी शामिल हैं.

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दिल्ली सरकार ने इन्हें भी खत्म कर दिया था. न्यायमूर्ति मनमोहन ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि सरकार का छह जनवरी के फैसला निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में नर्सरी दाखिले पर उपराज्यपाल के 2007 के आदेश के उलट भी है. उन्होंने कहा कि नर्सरी दाखिले के बारे में गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की स्वायत्ता को किसी सरकारी आदेश से नहीं प्रतिबंधित किया जा सकता क्योंकि इसे कानून के मुताबिक करना होगा.

हालांकि, अदालत ने कहा कि यदि निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में नर्सरी दाखिले के बारे में कोई धांधली हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाया जाना चाहिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके द्वारा प्रकट किया गया विचार सिर्फ प्रथम दृष्टया है और आखिरी नहीं है.

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने अपने छह जनवरी के आदेश से दाखिले के लिए स्कूलों द्वारा अपनी वेबसाइटों पर सूचीबद्ध 62 ‘मनमाने और भेदभावपूर्ण’ अर्हता को रद्द कर दिया है. लेकिन आर्थिक रुप से कमजोर तबके के लिए 25 फीसदी कोटा कायम रखा है. उच्च न्यायालय ने एक्शन कमेटी अनएडेड रिकग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल और फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर ऑल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. याचिकाओं में दावा किया गया था कि आदेश बगैर अधिकारक्षेत्र के है और उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय की विभिन्न पीठों के विभिन्न फैसलों के उलट और असंगत है.


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