भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के महासचिव और राज्यसभा सांसद सीताराम येचुरी ने सोमवार को कहा कि जेएनयू विवाद के जरिए बीजेपी इतिहास की जगह पौराणिक कथाओं और दर्शन की जगह वेदों को लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कन्हैया मोदी की चूक की वजह से एक आइकन बना है।

Sitaram Yechury

उन्होंने कहा कि जेएनयू विवाद की आड़ में गैरकानूनी ढंग से नियम थोपने और हिंसा भड़काने की कोशिश हुई है। हालांकि यह आपातकाल के समय जैसी स्थिति नहीं थी, लेकिन उसी राह में चीजें आगे जा रही हैं।
‘कोर्ट के आदेश पर भी उठाई उंगली’
सीपीआई नेता ने कोर्ट पर भी सवाल उठाए और कहा, ‘अगर आप कन्हैया को जमानत देने के ऑर्डर पर गौर करें तो कुछ संदेह पैदा होता है कि आखिर न्यायपालिका के अंदर चल क्या रहा है। हालांकि मैं ये नहीं कह रहा कि ये आपातकाल है।’
‘यह हार-जीत नहीं, विचारों की लड़ाई है’
रोहित वेमुला मामले में उन्होंने कहा कि हमने युवाओं को एकजुट करने में कामयाबी हासिल की। येचुरी ने कहा, ‘अरुण जेटली ने जिस तरह पूरे आंदोलन को बीजेपी की जीत बताया है वह दुखद है। जेल जाने से पहले छात्रों ने तिरंगा लहराते हुए जय हिंद का नारा लगाया था और वापस आने के बाद भी वहीं किया। यहां सवाल जीत का नहीं, विचारों की लड़ाई का है। क्या हम एक सेकुलर गणतंत्र हैं या फिर इसे हिंदू राष्ट्र बनाने जा रहे हैं?’
येचुरी ने यह भी कहा कि कम्युनिस्ट लोकतंत्र के खिलाफ नहीं है। जो ऐसा समझते हैं वो गलत हैं। उन्होंने कहा, ‘सरकार की पॉलिसी ही नहीं है कि पाकिस्तान से संबंध सुधरें। अगर ऐसा होता तो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना देश विरोधी नहीं माना जाता। अगर कोई भारत-मुर्दाबाद के नारे लगाता है तो वह देश विरोधी होगा।’
‘मोदी से हुई गलती और सामने आ गया कन्हैया’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए येचुरी ने कहा कि जेएनयू मामले में जिस तरह का रवैया सरकार का रहा है, कन्हैया उसी की उपज है। उन्होंने कहा, ‘कन्हैया कुमार, मेक इन इंडिया का सबसे बेहतर उदाहरण है। वह मोदी ही हैं, जिन्होंने मामले को गलत ढंग से हैंडिल किया और कन्हैया उभर कर सामने आ गया। मोदी ने कन्हैया को देश का आइकन बना दिया।’ (hindkhabar)


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