नई दिल्ली। जेएनयू विवाद पर रविवार को महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि आरोपियों का मीडिया ट्रायल न हो। इस मामले में कोर्ट तय करे कौन दोषी है और कौन बेकसूर। राजनीतिक दल इस विवाद से लाभ लेना चाहते हैं। इस मामले में दोषी उमर खालिद हो या कन्हैया कोर्ट फैसला करे। इस मामले में राजनीतिक दलों की वजह से स्थिति बिगड़ी है।

नौ फरवरी को जेएनयू में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन की तरफ से अफजल गुरु की बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सांस्कृतिक संध्या के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में कश्मीर की आजादी पर चर्चा होनी थी और अफजल गुरु से जुड़ी एक फिल्म भी दिखाई जानी थी। सांस्कृतिक संध्या के लिए के लिए पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इजाजत दी थी, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से बीस मिनट पहले उसे रद्द कर दिया गया। बावजूद इसके डीएसयू के उमर खालिद की अगुवाई में कार्यक्रम हुआ और उसमें देश विरोधी नारे लगे। वहां मौजूद अभाविप के लोगों ने इसका विरोध किया और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यक्रम के दौरान वहां पुलिस मौजूद थी, लेकिन वो मूकदर्शक बनी रही।

अभाविप ने अगले दिन थाने में शिकायत दर्ज करवाई और यूनिवर्सिटी कैंपस में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्यारह फरवरी को भाजपा सांसद महेश गिरी ने वसंतकुंज थाने जाकर एफआईआर दर्ज करवाई। पुलिस ने अज्ञात लोगों पर धारा 124ए के तहत केस दर्ज किया। बारह फरवरी को जांच के लिए पुलिस जेएनयू पहुंची और छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

कन्हैया के अलावा एफआईआर में कार्यक्रम के आयोजक उमर खालिद समेत पांच और लोगों के नाम हैं। दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कन्हैया ने भी देश विरोधी नारे लगाए थे।

15 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के दौरान वकीलों ने पत्रकारों और कोर्ट में मौजूद जेएनयू के छात्रों के साथ मारपीट की। कोर्ट में कन्हैया की पेशी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा निर्देश के बावजूद 17 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में फिर हंगामा हुआ। वकीलों ने पेशी के दौरान कन्हैया पर हमला किया। पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी हुई।

दिल्ली पुलिस व खुफिया विभाग ने जेएनयू मामले पर एक स्टेटस रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी है। सूत्रों के मुताबिक, इस रिपोर्ट में कहा है कि 9 फरवरी की सुबह खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने जेएनयू में एक पोस्टर देखा, जिसमें लिखा था कि शाम 5 बजे साबरमती ढाबे में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम होना है। पोस्टर में एक शीर्षक भी लिखा था ‘द कंट्री विदआउट ए पोस्टऑफिस’ यह कार्यक्रम संसद हमले के दोषी अफजल गुरु और आतंकी मकबूल भटट् की फांसी के विरोध को लेकर था, जिसमें कश्मीर के लोगों की आजादी का भी जिक्र था। इस पोस्टर में अनिरबन, अंजलि, अनवेश, अवस्थी, भावना, कोमल रियाज, रूबीना, उमर और समर के नाम लिखे हुए थे। (Naidunia)


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