लखनऊ | पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावो के नतीजे आने के बाद से कई राजनितिक पार्टियों में घमासान मचा हुआ है. समाजवादी पार्टी में तो चुनाव से पहले ही खींचतान शुरू हो गयी थी लेकिन आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में हाल ही में कलह शुरू हुई है. जिसका खामियाजा कुछ नेताओं को भुगतना पड़ा है. इसमें बसपा के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी का नाम भी शामिल है.

बसपा प्रमुख मायावती ने बुधवार को नसीमुद्दीन और उनके बेटे को पार्टी विरोधी गथिविधियो में संलिप्त होने के आरोप में पार्टी से बाहर कर दिया. इस तरह पार्टी से निकाले जाने के बाद से नसीमुद्दीन आक्रामक मुद्रा में है. उन्होंने कल ही एलान किया था की वो मायावती के खिलाफ एक बड़ा खुलासा करेंगे. इससे पहले उन्होंने एक पत्र जारी करके मायावती को खूब भला बुरा कहा.

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नसीमुद्दीन ने मायावती को एहसान फराहमोश और घमंडी बताते हुए वो दिन याद दिलाये जा वो 1996 में बिल्सी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रही थी. नसीमुद्दीन ने कहा की तब मैं वहां का चुनाव प्रभारी था. उस दौरान मेरी बेटी की तबियत खराब हो गयी थी और डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया था. लेकिन आपने मुझे मेरी बेटी के पास तक नही जाने दिया था. बाद में मेरी बेटी ने दम तोड़ दिया और मैं उसके जनाजे में भी शामिल नही हो सका.

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नसीमुद्दीन ने आगे कहा की मेरी ही मेहनत का नतीजा है की इन विधानसभा चुनावो में पार्टी को 22 फीसदी वोट मिले. नही तो हालत इससे भी जायद ख़राब होने वाली थी. मायावती की पोल खोलने नसीमुद्दीन ने कहा की मायावती मुस्लिमो की कभी भी हितेषी नही रही. वो हमेशा बैठक के दौरान मुस्लिमो को भद्दी भद्दी गालियाँ देती थी जिसका मैं विरोध करता था. इसलिए मुझे पार्टी से बाहर निकाला गया. नसीमुद्दीन ने इसे सतीश चन्द्र मिश्रा की साजिश करार दिया.

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