नई दिल्ली | मंगलवार को राज्यसभा में बोलते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती अचानक से नाराज हो गयी और इस्तीफा देने का एलान कर सदन से बाहर चली गयी. मायावती का आरोप था की उन्हें सदन में दलितों और गरीबो की आवाज उठाने से रोका जा रहा है. बाहर मीडिया से बात करते हुए मायावती ने कहा की अगर वो राज्यसभा में अपने समाज के हितो की आवाज ही नही उठा सकती तो उन्हें राज्यभा में रहने का भी कोई अधिकार नही है.

इसके बाद मायावती ने बीजेपी पर दलित और गरीब विरोधी होने का आरोप लगा राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को भेजे अपने तीन पेज के इस्तीफे में मायावती ने पूरी घटना का सिलसिलेवार वर्णन किया. इस्तीफे में भी मायावती ने लिखा की मैं अपने समाज की रक्षा नही कर पा रही हूँ. मुझे अपनी बात रखने का मौका नही दिया जा रहा है तो फिर सदन में रहने का भी कोई मतलब नही है. इसलिए मैं अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूँ.

फ़िलहाल खबर है की राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने मायावती का इस्तीफा मंजूर कर लिया है. यह देखने वाली बात होगी की मायावती का यह इस्तीफा उनको अपनी राजनितिक जमीन तलाशने में कितना मददगार साबित होगा. हालाँकि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने मायावती को ऑफर देते हुए कहा की अगर वो चाहे तो हम उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजने के लिए तैयार है. लालू ने मायावती को बहादुर नेता करार दिया.

बताते चले की मायावती का राज्यसभा का कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म हो रहा था. जबकि दोबारा उनका दोबारा राज्यसभा के लिए चुना जाना भी मुश्किल था क्योकि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावो में उनकी पार्टी को केवल 19 सीटें मिली थी. वही राज्यसभा सदस्य बनने के लिए करीब 29 विधायको की जरुरत है. ऐसे में बिना समाजवादी पार्टी या किसी अन्य राजनितिक दल की सहायता के उनका राज्यसभा सदस्य मुश्किल है. लेकिन उनके इस्तीफे के बाद समीकरण बदल गए है.


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