लखनऊ | सहारनपुर में जातीय संघर्ष के बीच उत्तर प्रदेश सरकारं ने गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौप दी है. रिपोर्ट में संघर्ष के पीछे भीम आर्मी का हाथ होने की बात कही गयी है. इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया की बसपा इस संगठन को समर्थन दे रही है और बसपा उपाध्यक्ष और मायावती के भाई उनको फंड मुहैया करा रहे है. भीम आर्मी को बसपा से जोड़ देने के बाद मायावती ने सफाई देते हुए इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया.

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उल्टा मायावती ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा की भीम आर्मी बीजेपी का प्रोडक्ट है. मीडिया को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा की मेरे भाई और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का भीम आर्मी से कोई लेना देना नही है. हम इन आरोपों की निंदा करते है. जबकि सहारनपुर में हमारी पार्टी के लोगो का मानना है की भीम आर्मी पूरी तरह से ही बीजेपी का प्रोडक्ट है.

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दरअसल 5 मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर गाँव में ठाकुरों और दलितों के बीच संघर्ष छिड गया था. करीब 20 दिन बाद भी यह संघर्ष जारी है. रोजाना दोनों वर्गों के बीच हिंसा की खबरे आ रही है. जिसमे कई लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. कई परिवारों के घर जलाये जा चुके है. स्थिति नियंत्रण में न होती देख सहारनपुर में रैपिड एक्शन फाॅर्स की चार कंपनिया भेजी गयी है.

इस पुरे घटनाक्रम के बीच भीम आर्मी का नाम बार बार सामने आ रहा है. पुलिस अधिकारियो का कहना है की सहारनपुर में पुलिस वालो पर हुए हमले में भीम आर्मी का ही हाथ था. इसके अलावा भीम आर्मी के लोग ही दलित समुदाय के लोगो को ठाकुरों के खिलाफ भड़का रहे है. इस आर्मी का लीडर चंद्रशेखर पेशे से वकील है. अभी रविवार को उसने जंतर मंतर पर एक रैली कर भीम आर्मी की ताकत दिखाने की भी कोशिश की है.

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