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आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कानपुर में उनकी पार्टी को दूसरी बार जनसभा की इजाजत नहीं मिलने के कारण चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया हैं.

दरअसल 28 अगस्त को कानपुर प्रशासन ने एआईएमआईए अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को शहर में कानून व्यवस्था के बिगड़ने का हवाला देते हुए जनसभा की इजाजत देने से इंकार कर दिया था.

पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार कानपुर के एक अधिकारी ने बताया, एआईएमआईएम को लिखे खत में कहा गया है कि अपने भड़काऊ भाषणों के लिए मशहूर ओवैसी कानपुर में सपा के विधायक इरफान सोलंकी के समर्थकों में शंका पैदा कर सकते थे. ओवैसी अपने भाषण से सपा को हासिल मुस्लिम समर्थन भी छीन सकते थे. ओवैसी को रोकने के लिए सपा कार्यकर्ता विरोध भी कर सकते थे जिससे कानून व्यवस्था पर असर पड़ सकता था.

AIMIM के राज्य संयोजक शौकत अली ने सपा पर अपनी पावर का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि खत में लिखी बातें ये साफ बयां करती हैं कि उच्चाधिकारी यूपी में कैसे काम करते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि यूपी सरकार उन्हें रैली करने की अनुममि नहीं दे रही है. यूपी की सपा सरकार जानती है कि यदि असदुद्दीन ओवैसी को सभा करने की इजाजद दी जायेगी तो यूपी में सपा का खेल खत्म हो जायेगा. उन्होंने इस मामलें को कोर्ट में लेकर जाने और निर्वाचन आयोग से शिकायत करने का फैसला किया हैं.


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