जयपुर, जागरण संवाद केंद्र। केन्द्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि हमारी विचारधारा बेशक अलग हो, लेकिन कन्हैया के कल-परसो के दिए गए बयान में कुछ गलत नहीं है। मैं भी छात्र आंदोलन में रहकर सरकारों का विरोध कर चुका हूं। इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन देश में बिखराव की मानसिकता को सहन नहीं किया जाएगा। मीडिया को जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

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जयपुर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए नकवी ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद हमारा संसदीय लोकतंत्र मजबूत हुआ है। जब भी चुनाव हो रहे है तो वोटिंग प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। लोग जज्बे के साथ मताधिकार का प्रयोग करते हैं। यदि लोगों की कसौटी पर कोई खरा नहीं उतरता है तो वे उसे रिजेक्ट भी कर देते हैं, लेकिन कोई ये नहीं कहता है कि हम अब कभी वोट नहीं देंगे। लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास मजबूत है। हमें विरासत में अविश्वास का माहौल मिला, उसे हमने पॉजिटिव करने की कोशिश की है, पीएम मोदी ने इसे अपनी प्राथमिकता में लिया है। सत्ता के दलालों की नाकेबंदी और लूट की लॉबी में तालाबंदी मोदी सरकार ने की है। एक बेहद ईमानदार सत्ता केन्द्र में है।

नकवी ने कहा कि राज्य सभा में बहुमत नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण काम नहीं कर पा रहे हैं। जीएसटी भी इसी वजह से पास नहीं हो पा रहा है। हंगामे और हुड़दंग के कारण संसद नहीं चल पा रही है। बजट सत्र से पहले पीएम ने सभी पार्टियों की मीटिंग बुलाई। उन्होंने कहा कि हमसे जो दो-दो हाथ करने हों कर लो देश के विकास से जुड़े मुद्दों पर डिबेट करें। सभी ने हां कहा, लेकिन अब भी उस स्थिति जस की तस है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर तीन-चार महीने में कोई न कोई चुनाव होते हैं। हमारे देश में अब ये नहीं है कि पांच साल बाद इलेक्शन होगा। केन्द्र और राज्य के चुनाव पांच साल में साथ होने चाहिए, जिससे खर्च कम होगा। (jagran)


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