लखनऊ – अभी तक भाजपा की चिर विरोधी समाजवादी पार्टी से एमएलसी रहे बुक्कल नवाब ने पार्टी बदलते ही एकदम सुर बदल लिया है. भाजपा ज्वाइन करते ही सबसे पहले उन्होंने राम मंदिर पर ब्यान दिया और कहा की “मैं इससे पहले भी राममंदिर की वकालत कर चूका हूँ और अगर राम मंदिर बनता हिया तो मैं दस लाख रुपए का चंदा और सोने का मुकुट चढ़ाऊंगा”.

समजवादी पार्टी छोड़ने की अपनी वजह अखिलेश यादव सरकार पर शियाओं पर होने वाले ज़ुल्म को बताया उन्होंने कहा की पिछली सरकार ने शियाओं पर बेहद ज़ुल्म किये और उनपर चुन चुनकर मुक़दमे दर्ज किये, इतना ही नही अलविदा जुमे को शिया धर्म गुरुओं को लाठी डंडों से पिटवाया, इसी से तंग आकर उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है”

हालाँकि बुक्कल नवाब ने यह नही बताया की उनका ज़मीर इतनी देर से क्यों जागा हिया लेकिन सत्ता के गलियारों में कहावत है की ‘देर आये, दुरुस्त आये,अपनी बचाए’. बुक्कल नवाब पर रिवर फ्रंट मामले में अपने जमीन की एवज में गलत तरीके से 8 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगा था. भगवा चोला पहनते ही बुक्कल नवाब ने कहा कि उन पर भ्रष्टाचार का एक पैसे का भी आरोप नहीं है और लगाए गए तमाम आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं.

लखनऊ शहर में बुक्कल नवाब शिया समुदाय के बड़े चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं, ऐसे में बीजेपी ने भी उन्हें गले लगाने में ज्यादा देर नहीं लगाई. इसे BJP की शियाओं के बीच सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.


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