जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने राज्य में तत्काल राज्यपाल शासन लगाने की मांग की है. उन्होंने कश्मीर के मौजूदा हालातों का हवाला देते हुए कहा के हालातों को सुधारने के लिए राज्यपाल शासन को तुरंत लागू किया जाए.

उन्होंने पीटीआई से कहा, हमने कभी राज्यपाल शासन को प्रोत्साहन नहीं दिया, हमेशा इसका विरोध किया। लेकिन अब दूसरा कोई रास्ता नहीं. उन्होंने कहा, ‘मोदी राज में जारी तनावों का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं. मैंने प्रधानमंत्री से जो बातचीत की वह आपको नहीं बता सकता. कुल मिलाकर यह कह सकता हूं कि वे राज्य के हालात पर चिंतित हैं और इसका समाधान चाहते हैं.‘

पूर्व मुख्यमंत्री ने महबूबा मुफ्ती सरकार पर ‘‘सभी मोर्चे पर विफल’’ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल दक्षिण कश्मीर ही नहीं समूची घाटी ‘‘त्रासदी’’ की गिरफ्त में है. अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘ये त्रासदी बाकी देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा रही हैं. इसलिए जितना जल्द इस समस्या का समाधान करेंगे, उतनी जल्दी ही हम इन अंगारों को धधकती आग में बदलने से रोक सकेंगे.’’

उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि मुख्‍यमंत्री को उसी दिन इस्‍तीफा दे देना चाहिए था जब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित रूप से यह बता दिया था कि वह अलगाववादियों से बात नहीं करेगी. कश्‍मीर में तनाव खत्म न होने का कारण पूछे जाने पर उन्‍होंने कहा कि आज हर चीज पहले की तुलना में अलग है क्‍योंकि पीडीपी नेता मुफ्ती साहब ने चुनाव के दौरान जो वादा किया था उसे भूल गए. जब वे चुनावों के लिए आए थे तब भाजपा और आरएसएस को दूर रखने का वादा किया था पर आज वही लोग उनके साथ हैं.


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