कांग्रेस ने मंत्री स्मृति ईरानी को एएमयू के दूसरे राज्यों में स्थित सेंटर्स के फंड रोकने पर घेरने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ और ‘अल्पसंख्यक संस्थान विरोधी’ है।

कांग्रेस ने रोहित वेमुला आत्महत्या और जेएनयू विवाद के बाद अब मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के दूसरे राज्यों में स्थित सेंटर के फंड रोकने पर घेरने की तैयारी कर ली है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ और ‘अल्पसंख्यक संस्थान विरोधी’ है। आजाद ने कहा कि केरल सीएम ओमन चांडी और सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने ईरानी ने मलाप्पुरम एएमयू सेंटर की फंडिंग को लेकर 8 जनवरी को मुलाकात की थी। बैठक में ईरानी ने उनसे कहा कि इस सेंटर की स्थापना गैरकानूनी रूप से की गई है , इसलिए मैं इसे फंड नहीं दे सकती।

बैठक में एएमयू के वीसी ले.जनरल जमीर उद्दीन शाह भी गए थे। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी ने वीसी को बैठक से चले जाने के लिए कहा। वीसी से कहा गया कि आपको तो बैठक के लिए बुलाया ही नहीं गया है। आजाद ने कहा कि मैंने वीसी से बात नहीं की है। लेकिन मुझे सीएम और बशीर ने बताया कि हमने वीसी से बैठक में आने के लिए निवेदन किया ताकि जरूरत पड़े तो मंत्री को ब्रीफ किया जा सके। मेरी रिपोर्ट के मुताबिक वीसी को बैठक में बैठने नहीं दिया गया। जिस तरीके से उनके साथ पेश आया गया अगर मैं वह बता दूं तो तो एक बड़ा विवाद पैदा हो जाएगा। रिटायर सेना अधिकारी वीसी ने सज्जनता दिखाते हुए, इस मुद्दे को नहीं उछाला। क्या कभी पहले किसी वीसी के साथ ऐसा हुआ है। अगर यह एनडीए सरकार का नजरिया है तो मैं कह सकता हूं कि ये यूनिवर्सिटी के अलसंख्यक दर्जा को खत्म करने की कोशिश करेंगे।

आजाद ने साथ कहा कि यूपीए सरकार के दौरान यूजीसी ने इस सेंटर को 45 करोड़ रुपए का फंड दिया था। लेकिन एनडीए सरकार ने सेंटर को फंड देना बंद कर दिया। यह भाजपा और एचआरडी मिनिस्टर का नजरिया बता रहा है। इसके बाद उनकी चंडी की दूसरी मुलाकात हुई उसमें भी ईरानी ने फंड नहीं देने की बात कही।

एएमयू के वीसी ने इस मुद्दे को लेकर शनिवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद वीसी ने बताया कि उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार में मौजूद एएमयू के सेंटर को मानव संसाधन मंत्री ने गैरकानूनी बताया था, वे सरकार की मंजूरी से ही बनाए गए थे।

उन्होंने पीएम मोदी के सामने जामिया मिलिया इस्लामिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का फंड अलग अलग क्यों है? हमने पीएम मोदी से फंड में समानता के लिए कहा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय अलिगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसा ही कि लेकिन उसे हमारे से 100 करोड़ रुपए ज्यादा मिलते हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया हमारे से साइज में आधी है लेकिन उसे 689 करोड़ रुपए ज्यादा मिलते हैं। (Jansatta)


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