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मुंबई | देश के सबसे बड़े सूबे में सत्ता पर विराजमान, समाजवादी पार्टी टूटने के कगार पर है. कल हुए नाटकीय घटनाक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव समेत चार लोगो को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. इससे पहले रामगोपाल यादव की एक खुली चिट्ठी ने सूबे के सियासी तापमान को और गरमा दिया. रामगोपाल यादव ने कुछ लोगो पर अखिलेश को कमजोर करने और सत्ता का दुरूपयोग करते हुए करोडो का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया.

इसकी प्रतिक्रिया में उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी अध्यक्ष शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया. शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव पर बीजेपी से मिले हुए होने का आरोप लगाते हुए कहा की प्रोफेसर साहब अपने बेटे और पुत्रवधू को सीबीआई से बचाने के लिए बीजेपी से जा मिले. शिवपाल का आरोप था की रामगोपाल के पुत्र अक्षय यादव और उनकी पत्नी पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप है.

पार्टी से निकाले जाने के बाद रामगोपाल यादव ने मुंबई से एक खुला पत्र लिखा. उन्होंने कहा की मुझे पार्टी से निकाले जाने का कोई दुःख नही है. लेकिन मुझ पर किये गए निजी हमलो से आहात हूँ, रामगोपाल ने मुलायम को चेताते हुए कहा की आप कुछ आसुरी ताकतों से घिरे हुए है, जब यह ताकते छंट जायेगी तब आपको सच्चाई का अहसास होगा.

रामगोपाल यादव ने अखिलेश का समर्थन करते हुए कहा की पार्टी से निकाले जाने के बाद भी मैं इस धर्मयुद्ध में हमेशा अखिलेश के साथ रहूँगा. मुलायम से मेरे बड़े भाई है लेकिन इसके साथ साथ वो मेरे राजनितिक गुरु भी है. मैं पूरी जिन्दगी उनका सम्मान करता रहूँगा. वो नही समझ रहे है की उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है. कुछ लोग नही चाहते की अखिलेश वापिस सत्ता में आये.


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