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वित्त वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तीन तलाक को लेकर चल रही बहस के बीच कहा कि सरकार  का विचार स्पष्ट है कि पर्सनल लॉ संविधान के दायरे में हों.

उन्होंने कहा कि तीन तलाक और यूनिफॉर्म सिविल कोड दो अलग अलग मुद्दे हैं. कोई भी पर्सनल लॉ संविधान के हिसाब से ही होना चाहिए. उन्होंने सोशल साईट पर लिखा कि तीन तलाक की संवैधानिक वैधता और समान आचार संहिता पूरी तरह अलग हैं. सरकार का नजरिया साफ है पर्सनल लॉ संविधान के हिसाब से ही होना चाहिए. तीन तलाक को भी समानता के अधिकार और सम्मान के साथ जीने के पैमाने पर ही परखा जाना चाहिए. ये कहने की जरूरत नहीं कि दूसरे पर्सनल लॉ पर भी यही पैमाना लागू होता है.”

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फेसबुक पर लिखे पोस्ट में जेटली ने कहा कि अतीत में सरकारें ठोस रुख अपनाने से बचती रही हैं पर वर्तमान सरकार का इस पर स्पष्ट रुख है कि पर्सनल लॉ को मूल अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए. जेटली ने लिखा है, वर्तमान में उच्चतम न्यायालय के समक्ष जो मामला है वह सिर्फ ‘एक साथ तीन बार तलाक बोलने’ की संवैधानिक वैधता के संबंध में है.

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जेटली ने आगे लिखा, “समान नागरिक संहिता को लेकर अकादमिक बहस विधि आयोग के समक्ष जारी रह सकती है. सभी समुदायों के अपने पर्सनल लॉ हैं, पर क्या ये पर्सनल लॉ संविधान के तहत नहीं आने चाहिए?”


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