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पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने ट्रिपल तलाक के विरोध में केन्द्र सरकार द्वारा दाखिल हफलनामे का स्वागत किया हैं. साथ ही उन्होंने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक होने के साथ गैर इस्लामी भी बताया.

खान ने ट्रिपल तलाक को लेकर हमेशा से ही विरोध रहा हैं. इस मुद्दें पर  उन्हें मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड के सदस्यों और अन्य मुस्लिम मौलवियों की आलोचना भी झेलनी पड़ी. 1990 के दशक में शाह बानो मामले में राजीव गांधी सरकार द्वारा कानून लाए जाने का कड़ा विरोध करने का कारण उन्हें कांग्रेस से इस्तीफा भी देना पड़ा था.

केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को ट्रिपल तलाक मामलें में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया जा चूका हैं. केंद्र सरकार द्वारा दाखिल किये गए हलफनामें में ट्रिपल तलाक का विरोध करते हुए कहा कि ट्रिपल तलाक लिंग भेद और सेक्युलकर देश के लिहाज से गलत है.

हलफनामे में सरकार की तरफ कहा गया है कि भारत में महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार देने से इनकार नहीं किया जा सकता. सरकार ने दावा किया कि ट्रिपल तलाक इस्लाम में एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है. ट्रिपल तलाक से बहुविवाह, लैंगिक न्याय, समानता और महिलाओं की गरिमा को देखा जा सकता है.

 


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