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गुजरात के उना में भगवा संगठनों द्वारा कथित गौरक्षा को लेकर चार दलित युवकों की बर्बर पिटाई का मामला संसद में भी उठा. इस मुद्दे पर तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार को घेरा और इस कृत्य की घोर निंदा की. साथ ही सभी दलों ने सरकार से दलितों पर हो रहे अत्याचार पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग भी की.

राज्यसभा में मायावती ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले गोहत्या के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा था अब दलितों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने सभी दलों से साथ आकर ऐसी चुनौतियों का सामना करने की अपील की. मायावती ने कहा कि बीजेपी को खुद इस मामले का संज्ञान लेकर केस दर्ज करवाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

मायावती ने कहा कि इस प्रकार के हमलों से दलितों के लिए लड़ाई लड़ने की मेरी इच्छा और पक्की हो जाती है. मायावती ने सदन में आरोप लगाया कि सभी लोगों ने दलितों की बात तो की लेकिन वास्तविक्ता में ज्यादा कुछ नहीं होता है. मायावती ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान बनाए जाने के बावजूद इस देश में दलितों को सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता है.

मायावती ने आरोप लगाया कि दलितों पर लगातार  अत्याचार हो रहा है लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है, इससे वे काफी निराश हैं. आजादी के इतने सालों बाद भी दलितों के साथ दुर्व्यवहार और उनपर अत्याचार खत्म नहीं हुआ है.


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