अहमदाबाद । आगामी गुजरात चुनावों को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस पूरे दमख़म के साथ प्रचार में लगी हुई है। इस दौरान दोनो ही और से आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। इसमें मर्यादाए भी ताक पर रखी जा रही है। हाल फ़िलहाल में हुए चुनावों के दौरान यह ख़ूब देखने को मिला है। जहाँ दूसरी पार्टी के नेताओ को किसी ख़ास शब्द के साथ उपहास उड़ाया गया। इसमें जहाँ प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘फेंकू’ तो कांग्रेस्स उपाध्य्क्श राहुल गांधी के लिए ‘पप्पू’ शब्द का इस्तेमाल किया गया।

गुजरात चुनावों में भी इन शब्दों का ख़ूब इस्तेमाल होने की सम्भावना है। क्योंकि राजनीति में अब सूचिता शब्द की कोई जगह नही रह गयी है। हालाँकि इस बार चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगाने का एक प्रयास किया है। इसी के मद्देनज़र चुनाव आयोग ने पूरे प्रचार के दौरान ‘पप्पू’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। चुनाव आयोग के आदेश के बाद भाजपा ने अपनी प्रचार सामग्री से इस शब्द को हटा दिया है।

भाजपा सूत्रों ने इस ख़बर की पुष्टि करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधीन आने वाली मीडिया समिति ने पीछले महीने पेश किए गए विज्ञापनो की स्क्रिप्ट में इस्तेमाल किया गए कुछ शब्दों पर आपत्ति जतायी है। इनमे पप्पू शब्द के इस्तेमाल को उन्होंने अपमानजनक क़रार दिया और इसे चुनाव प्रचार सामग्री से हटाने का आदेश दिया। समिति ने हमें इसकी जगह पर कोई दूसरा शब्द इस्तेमाल करने के लिए कहा है।

मालूम हो कि किसी भी चुनाव में इस्तेमाल होने वाली प्रचार सामग्री को पहले चुनाव आयोग की मीडिया समिति के पास भेजना पड़ता है। उनकी मंज़ूरी के बाद ही प्रचार सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। उधर चुनाव आयोग के आदेश पर एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा की हमने पप्पू शब्द का इस्तेमाल सीधे सीधे किसी व्यक्ति के लिए नही किया था। इसलिए हमने आयोग से इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।


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