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देश में तीन तलाक को लेकर मची बहस के बीच सरकार को वामदलों का इस मुद्दें पर साथ मिल गया हैं हालांकि समान नागरिक संहिता के मुद्दें पर वामदलों ने सरकार की आलोचना की हैं.

माकपा ने बयान जारी कर कहा कि जब दूसरे मुस्लिम देशों में तीन तलाक के प्रावधान की अनुमति नहीं है तो फिर भारत में क्यों नहीं परिवर्तन होना चाहिए. साथ ही माकपा ने सरकार को आगाह भी कर दिया कि समान नागरिक संहिता की ओर कदम न बढ़ाए.

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माकपा ने आगे कहा, समान नागरिक संहिता को आगे बढ़ाने का कोई भी कदम महिलाओं के लिए नुकसानदायक है, क्योंकि समानता बराबरी की गारंटी नहीं है. केंद्र सरकार की मंशा से ऐसा लगता है कि उनकी इच्छा महिलाओं की बराबरी सुनिश्चित करने की नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमान समुदाय को निशाने पर लेना है.

बयान में आगे कहा गया कि हिंदू महिलाओं के लिए पर्सनल लॉ में पहले ही सुधार कर लिया गया है, यह दर्शाता है कि उनकी दिलचस्पी महिलाओं की समानता सुनिश्चित करने में नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों खासकर मुसलमानों को निशाना बनाने में है. क्योंकि अब भी संपत्ति का अधिकार व अपना जीवनसाथी चुनने के अधिकारों में हिंदू महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है.

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