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लखनऊ | पुरे देश में भगवान श्री राम के रूप में हिंदुत्व एजेंडे को आगे बढाने वाली बीजेपी लगातार इस मुद्दे पर राजनीती करती आई है. यही वह मुद्दा है जिसने बीजेपी को कई राज्यों और केंद्र में सत्ता दिलवाई है. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठाकर सत्ता तक पहुंची बीजेपी अभी भी इस मुद्दे को अपने हाथ से जाने नही देना चाहती. यही वजह है की यूपी की योगी सरकार ने अयोध्या में सरयू नदी पर श्री राम की 100 फीट की मूर्ति लगाने का फैसला किया है.

हालाँकि यह प्रोजेक्ट अभी भी शुरुआती फेज में है लेकिन सूत्रों के अनुसार जल्द ही इस प्रोजेक्ट को धरातल पर भी शुरू कर दिया जाएगा. योगी सरकार का अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति लगाने का फैसला यह स्पष्ट करता है की बीजेपी इस मुद्दे को 2019 के लोकसभा चुनावो तक जिन्दा रखना चाहती है जिससे की लोगो में यह सन्देश भेजा जा सके की अकेले बीजेपी ही हिंदुत्व की बात करने वाली पार्टी है. लेकिन अब बाकी दल, बीजेपी की इस रणनीति को फेल करने की कोशिश में लग गए है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने सबसे पहले यह पहल की है. उन्होंने गुजरात चुनावो में प्रचार के दौरान कई मंदिरो में जाकर पूजा अर्चना की और लोगो को सन्देश देने की कोशीश की , कि कांग्रेस भी हिन्दुओ के हितो की चिंता करती है. अब कुछ ऐसा ही उनके यूपी के साथी अखिलेश यादव भी करने जा रहे है. खबर है की अखिलेश यादव सैफई में भगवान कृष्ण की 50 फिट ऊँची मूर्ति लगाने जा रहे है. फ़िलहाल यह मूर्ति सैफई पहुँच चुकी है.

जहाँ भगवान् राम की मूर्ति का विचार अभी केवल प्रेजेंटेशन और फाइलो में ही कैद है वही अखिलेश यादव ने यह मूर्ति सैफई मंगा ली है. खबर है की इस मूर्ति को यादव परिवार के निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज में लगाई जायेगी. हालाँकि अखिलेश ने इस मूर्ति को बड़ा ही गुप्त रखा है लेकिन सैफई पहुँचते ही यह मामला सामने आ गया. जानकारो के अनुसार अखिलेश इस मूर्ति के सहारे लोगो को यह सन्देश देना चाहते है की अकेले बीजेपी ही हिन्दुओ की पार्टी नही है. बाकी दल भी हिन्दुओ के हितो के बारे में सोचते है.


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