नई दिल्ली विजय माल्या मामले में केंद्र के नरम रुख पर सोमवार को शिवसेना ने कहा है कि सरकार दाऊद इब्राहिम को कैसे भारत लाएगी, जब वह एक व्यापारी को देश में वापस नहीं ला सकती। पार्टी के नेता संजय राउत ने कहा, ‘ललित मोदी और विजय माल्या जैसे लोगों को कैसे भारत छोड़ने दिया जा सकता है? हमारी कई एजेंसियां हैं जो उन्हें ट्रैक कर सकती हैं। इसके कोई मायने नहीं कि माल्या कितने पॉवरफुल हैं, यह सिस्टम की असफलता है।’

शिव सेना के मुताबिक केंद्र इस मामले में लाचार नजर आया। राउत ने कहा कि एक तरफ तो सरकार दाऊद को भारत लाने जैसे दावे करती है, जबकि वह एक भारतीय नागरिक को भी नहीं ला सकी।
udhav-650_650x488_61431800574इससे पहले विजय माल्या ने दावा किया था कि बैंकों ने सभी पहलुओं की जांच करने के बाद ही उन्हें लोन दिए थे। उन्होंने कहा कि वह कानून से बचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं और एक पर्सनल विजिट पर आए हुए हैं।

संडे गार्जियन से ईमेल पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें पहले ही अपराधी की तरह पेश किया गया है, और इसलिए यह उनकी वापसी का उचित समय नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मेरे खिलाफ पिछले साल नोटिस जारी हुआ था। लेकिन मैं नहीं भागा। मुझे क्यों एक अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है? लोन नहीं चुका पाना एक व्यापारिक मुद्दा है। बैंक जब लोन देते हैं, तो उन्हें इसके खतरों का पता होता है। यह वे तय करते हैं, हम नहीं। मेरा बिजनस अच्छा चल रहा था, लेकिन अचानक तेजी से गिरा। मुझे खलनायक न बनाएं। मैं चुप हूं क्योंकि मुझे डर है कि मेरे शब्दों को घुमा दिया जाएगा।’

माल्या ने कहा कि उन्हें बदनाम करने के पीछे कुछ लोगों का हाथ है। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह वापस आना चाहते थे, लेकिन उन्हें इस बात का डर था कि शायद उन्हें अपनी बात कहने का मौाका न मिले क्योंकि उनकी छवि पहले ही एक अपराधी की बना दी गई थी।

माल्या से जब उनकी मौजूदा लोकेशन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह बताना उनके लिए सही नहीं होगा। (NBT)


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