एक बार फिर आरक्षण के मुद्दे को लेकर बसपा सुप्रीमों मायावती ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। मायावती ने कहा है कि प्रधानमंत्री आरक्षण पर सफाई देने की बजाय भाजपा नेताओं की व्यर्थ बयानबाजी पर अंकुश लगाएं।

BSP supremo Mayawati

मायावती ने कहा है कि राष्ट्रीय सेवक संघ (आर.एस.एस.) व भाजपा नेताओं की कथनी और करनी में अन्तर है। प्रधानमंत्री बार-बार सफ़ाई दे रहे हैं कि आरक्षण को कोई छीन नहीं सकता है लेकिन इन लोगों पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। वास्तव में यह सब भी उसी प्रकार की जुमलेबाजी लगती है जैसा कि उन्होंने विदेशों से काला धन देश में वापस लाकर हर भारतीय के अकाउंट में 15-15 लाख डालकर उनके ‘अच्छे दिन’ लाने का वादा किया था।

बसपा अध्यक्ष ने आज यहां एक जारी बयान में कहा है कि ‘आरक्षण’ के मामले में आर.एस.एस. का जब भी विवादित बयान आता है मोदी सफ़ाई देते हैं कि आरक्षण दलितों का हक़ है, इसे कोई छीन नहीं सकता है। सदियों से गुलामी व अपमान झेलते चले आ रहे दलितों के लिये आरक्षण की व्यवस्था कोई मामूली हक़ नहीं है। बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर ने उन्हे जीने का एक संवैधानिक हक दिया है। इसे पहले कांग्रेस और अब भाजपा सरकार की मिली भगत से निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाकर रख दिया गया है।

मायावती ने कहा कि दोनों पार्टियो ने संविधान के इस प्रकार के विशेष मानवतावादी प्रावधानों को ‘‘कागजी व दिखावटी बनाकर रख दिया है। कांग्रेस और भाजपा ने आरक्षण को पिछले 68 वर्षों के दौरान ईमानदारी पूर्वक से लागू ही नहीं होने दिया। अब उसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग आरक्षण की इस व्यवस्था में कमियां निकालकर इसकी समीक्षा की अनुचित जातिवादी बातें कर रहे हैं। मायावती ने कहा कि इसमें आर.एस.एस. और भाजपा की कट्टर हिन्दुत्ववादी विचारधारा साफ झलकती है। ऐसी मानसिकता वाले लोगों को दलितों और अन्य पिछडों से माफी मांगनी चाहिए। आरक्षण का 50 प्रतिशत लाभ भी इन उपेक्षित और शोषित लोगों को अब तक नहीं पहुंचा पाये हैं।

उन्होंने कहा कि आर.एस.एस. और भाजपा में जातिवादी मानसिकता रखने वाले लोगों ने ही कभी भी दलितों के मसीहा बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का भला नहीं होने दिया। अपनी सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालने के लिये साम, दाम, दण्ड, भेद के हथकण्डों को अपनाया जा रहा है। इन हथकण्डों में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर स्मारक और संग्रहालय आदि की घोषणा करके उन्हें अनेकों प्रकार से बरग़लाने का काम भी शामिल है। इन लोगों की साजिश से देश की जनता को और खासकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और पंजाब आदि राज्यों के लोगों को बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है।

मायावती ने कहा कि मोदी सरकार वास्तव में दलितों की हितैषी बनना चाहती है तो सबसे पहले उसे सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण की रूकी व्यवस्था को बहाल करना चाहिए। इस संबंध में संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा से पारित होकर लोकसभा में लंबित है। प्राइवेट सेक्टर और अन्य जिन क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं है, वहां पर मोदी सरकार को आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चत करनी चाहिए। सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में हकाारों की संख्या में आरक्षित पद वर्षों से खाली पड़े हुये हैं।

उन्होंने कहा कि आरक्षण के मामले में बार-बार सफाई देने में समय बर्बाद करने के बजाय, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहले अपनी पार्टी, सरकार और आर.एस.एस. के लोगो पर सख्त अंकुश लगाना चाहिए जो इसे लेकर आये दिन गलत और व्यर्थ की बयानबाजी करते रहते हैं। सरकारी स्तर पर पहल करके आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में कारूर शामिल कर लेना चाहिये, तभी लग पायेगा कि सरकार दलितों को आत्म-सम्मान व स्वाभिमान देने के मामले में थोड़ी गंभीर है। केवल ‘जुमलेबाजी’ से इस उपेक्षित समाज के लोगों का भला नहीं हो पायेगा। बसपा की स्थापना से पहले ऐसी जुमलेबाजी कांग्रेस पार्टी भी लगातार करती रही थी। (hindkhabar)


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