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नोएडा – बुधवार को दादरी बीफ हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया। मृतक मुहम्मद इखलाक के परिवार ने पुलिस पर आरोपियों को शरण देने का आरोप लगाया है। इखलाक की बेटी शाहिस्ता ने कहा, ‘शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि पुलिस जांच में निष्पक्षता दिखा रही है। पिछले कुछ दिन से हमें ऐसा महसूस हो रहा है कि पुलिस आरोपियों पर नर्मी बरत रही है।’

शाहिस्ता मीडिया में छपी उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रही थी, जिनमें कहा जा रहा था कि पुलिस ने इस मामले में अदालत में दाखिल कागजातों में 19 आरोपियों के शामिल होने की बात कही है। कहा जा रहा था कि पुलिस ने कहा है कि जिन दो आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, वे हत्या के समय वारदात की जगह पर मौजूद नहीं थे।

शाहिस्ता ने कहा, ‘पुलिस आरोपियों की वकालत कर रही है। हमें मालूम चला है कि पुलिस ने अदालत के सामने कागजात जमा किए हैं। इनमें आरोपी सोनू को वारदात के समय जीआईपी मॉल में मौजूद बताया गया है, लेकिन मैं यकीनन कह रही हूं कि वह शामिल था। मेरे पिता को पीटकर मारने वाले लोगों में से हर एक की शक्ल मुझे याद है।’

दादरी घटना के बाद पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इखलाक की बेटी ने अपने बयान में 6 और लोगों का नाम लिया था। वहीं इखलाक के बेटे दानिश ने अपने बयान में 3 और लोगों का नाम लिया। पुलिस ने कुल 19 आरोपियों पर मामला दर्ज किया। इनमें से केवल 17 की ही गिरफ्तारी हुई। पुनीत और सोनू नाम के 2 आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। पुनीत के परिवार का दावा है कि घटना के दिन वह हरियाणा के झज्जर जिले के एक अस्पताल में भर्ती था।

इखलाक के भाई मुहम्मद जमील ने कहा कि शुरुआत में जब इस घटना के बारे में देश-विदेश में खबरें दिखाई जा रही थीं, तब पुलिस इस मामले में काफी सतर्कता बरतते हुए मुस्तैदी दिखा रही थी। शुरुआत में जिन 10 लोगों पर आरोप था, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस इस मामले में ढिलाई बरत रही है।

जमील ने कहा, ‘पुलिस सभी आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही है। हम इस मुद्दे को राज्य सरकार और अदालत के सामने रखेंगे।’ इखलाक के परिवार का कहना है कि पुलिस गांव के मंदिर के पुजारी सुखबर दास की गिरफ्तारी को टाल रही है। मालूम हो कि दास पर मंदिर के लाउडस्पीकर पर इखलाक के घर में बीफ होने की घोषणा कर ग्रामीणों को भड़काने का आरोप है। पुलिस ने दास से कुछ दिनों तक पूछताछ की थी, लेकिन फिर उसे छोड़ दिया गया। जांच में यह भी पता चला था कि घटना वाले दिन दास का एक शिष्य भी गांव में आया था।

कानूनी कार्रवाई से डरकर दास किसी अज्ञात जगह पर चला गया था। इखलाक के परिवार ने कहा कि दास को इस मामले में मुख्य आरोपी बनाकर जांच की जानी चाहिए। जमीन ने कहा, ‘उसने घोषणा की, इसीलिए उसे आरोपी माना जाना चाहिए। वह एक अहम प्रत्यक्षदर्शी भी है। वह उन युवाओं की पहचान कर सकता है, जिन्होंने उसे मंदिर के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर वह घोषणा करने के लिए मजबूर किया था।’

इखलाक के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी संजय सिंह ने कहा, ‘ना तो हमसे मृत इखलाक के परिवार ने संपर्क किया है और ना ही उन्होंने इस तरह के बयान पहले दिए हैं। अगर वे इस सिलसिले में सबूत देते हैं, तो हम जांच करेंगे।’ बुधवार को ग्रेटर नोएडा की एक अदालत ने अरुण उर्फ अनु की जमानत याचिका खारिज कर दी। अभी तक इस मामले में केवल अरुण ने ही जमानत की याचिका दाखिल की है।

उधर, बुधवार देर शाम नोएडा पुलिस ने इखलाक की हत्या करने के आरोप में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस नाबालिग आरोपी पुनीत को बिसाहड़ा स्थित उसके घर से पकड़ा गया। कुछ दिन पहले उसके परिवार ने दावा किया था कि हत्या के दिन पुनीत झज्जर के एक अस्पताल में भर्ती था। पुनीत की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में अब तक पकड़े गए लोगों की संख्या 18 पर पहुंच गई है।


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