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समाजवादी पार्टी में चल रही वर्चस्व की लड़ाई को लेकर घमासान के बीच रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल सहित अमर सिंह के करीबी नेताओं को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया. साथ ही अमर सिंह की करीबी माने जाने वाली जयाप्रदा से भी उनका पद छीन लिया.

रविवार को हुई एक अहम बैठक में अखिलेश यादव बेहद भावुक नजर आयें. इस दौरान उन्होंने अमर सिंह को दलाल कहते हुए कहा, नेताजी मेरे नेता ही नहीं पिता भी हैं. पूरी उम्र उनकी सेवा करते रहूंगा. मेरा पार्टी को तोड़ने का कोई इरादा नहीं है. कल नेताजी की बैठक में विधायक के तौर पर जाऊंगा। पार्टी के लिए प्रचार भी करूंगा.’

अखिलेश ने आगे कहा कि मेरे घर में आग अमर सिंह ने लगाई है. मैं उन पर कार्रवाई करूंगा. उन्होंने आगे कहा कि अमर सिंह और दूसरे बाहरी लोगों को पार्टी के अंदर नहीं रहने दिया जाएगा. अमर सिंह हमारा घर तोड़ना चाहते हैं. अमर सिंह के साथी हमारे साथ नहीं रह सकते. मैं ही नेताजी का उत्तराधिकारी हूं. पार्टी नेता जी की है, वह फैसला करें.

मीटिंग के दौरान अखिलेश ने कहा कि वे अपने पिता का काफी सम्मान करते हैं. उम्र के इस पड़ाव पर आकर वे ऐसा कोई काम नहीं करना चाहते, जिससे नेताजी आहत हो जाएं। लेकिन हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें मजबूरी में कुछ कदम उठाने पड़ रहे हैं. अखिलेश ने यह भी कहा कि मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि अपने घर से अलग होकर पत्नी डिंपल के साथ सरकारी आवास पर रहना पड़ेगा.

इस दौरान मीटिंग में मौजूद 183 विधायकों ने अखिलेश में पूरा भरोसा जताते हुए उन्हें समर्थन देने का प्रस्ताव पास किया. मीटिंग के दौरान उनके भाषण को सुनते हुए कई नेता रो भी पड़े


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