इटावा | अखिलेश यादव को साइकिल चुनाव चिन्ह मिलते ही, समाजवादी परिवार में मचा घमासान समाप्त हो गया. अखिलेश , पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष बन गए और लगा सब कुछ ठीक हो गया. लेकिन भतीजे से हारने की कसक आज भी शिवपाल यादव के चेहरे और बयानों में दिख जाती है. यही कारण है की उन्होंने एक जनसभा में कह दिया की वो 11 मार्च के बाद अलग पार्टी बनायेंगे. शिवपाल के बयानों से नाराज अखिलेश के सब्र का बांध भी अब टूट चूका है.

उन्होंने इटावा की एक रैली में शिवपाल पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा की यह तो मेरी इमानदारी है की मैं उनसे कोई हिसाब नही मांग रहा हूँ. उनके पास बूथों पर खर्च करने के लिए पैसा है , इसलिए उन पर नजर रखी जाए. वो लोगो जिन्होंने मेरे और नेता जी के बीच दरार पैदा की , उन लोगो को इटावा की जनता सबक सिखाने का काम करे.

साइकिल चुनाव चिन्ह पर मचे घमासान पर अखिलेश ने कहा की कुछ लोगो ने मेरी भी साइकिल छीन ली होती लेकिन मैंने साइकिल इतनी तेज दौड़ा दी की वो पीछे रह गए. अखिलेश का सीधा सीधा इशारा शिवपाल यादव और अमर सिंह की और था. इटावा में नही आने का कारण बताते हुए अखिलेश ने कहा की मैं इटावा नही आता क्योकि मुझे उम्मीद थी की वो इस क्षेत्र का ख्याल रखते है.

अखिलेश ने आगे कहा की कुछ लोग कहते है की मैं चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुआ. लेकिन क्या यह भी मेरी गलती थी. मुझे नेता जी ने आगे कर जो जिम्मेदारी दी, उसके बाद मेरा दायित्व बनता है की मैं पार्टी को आगे ले जाऊ. मालूम हो की अखिलेश के चाचा शिवपाल , इटावा के जसवंत नगर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे है. 


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