नई दिल्ली | अभी हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावो के नतीजे आने के बाद ज्यादातर राजनितिक पार्टियों ने ईवीएम् पर सवाल खड़े किये. इनमे सबसे मुखर तौर पर आम आदमी पार्टी और बसपा ने आवाज उठाई. इन पार्टियों का कहना था की चुनावो के समय ईवीएम् में छेड़छाड़ की गयी जिसकी वजह से बीजेपी को इतनी बम्पर जीत प्राप्त हुई. हालाँकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को नकार दिया.

लेकिन आम आदमी पार्टी यह मुद्दा लगातार उठाती रही. एमसीडी चुनावो के दौरान आप ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की. लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी मांग को ख़ारिज कर दिया. एमसीडी चुनावो के नतीजे आने के बाद आप ने एक बार फिर ईवीएम् में छेड़छाड़ की बात की. यहाँ तक की उनके एक विधायक सौरभ भारद्वाज ने विधानसभा में ईवीएम् जैसी दिखने वाली एक मशीन को हैक करके भी दिखा दिया.

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इस घटना के बाद चुनाव आयोग पर ईवीएम् को टैम्पर प्रूफ साबित करने का दबाव आ गया. इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने सभी दलों के एक बैठक बुलाकर उनको ईवीएम् की पूरी कार्यप्रणाली समझाने का प्रयास किया. इसके बाद चुनाव आयोग ने सभी दलों को चुनौती देते हुए कहा की वो 3 जून से एक प्रतियोगिता शुरू करेगा जिसमे कोई भी दल अपने एक्सपर्ट लाकर ईवीएम् को हैक करके दिखा सकता है.

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26 मई तक सभी दलों को इसके लिए नामांकन करना था लेकिन यह तारीख बीत जाने के बाद केवल दो पार्टियों ने नामांकन कराया. चौकाने वाली बात यह थी की आप ने इस प्रतियोगिता के लिए नामांकन नही किया. इस पर सफाई देते हुए पार्टी ने कहा की चुनाव आयोग हैकाथोन नही मजाक कर रहा है. हम मजाक का हिस्सा नही होंगे. आप नेता संजय सिंह ने कहा की चुनाव आयोग चाहता है की हम मन्त्र फूंककर ईवीएम् हैक करके दिखा दे. इसलिए हम इसे मजाक की संज्ञा दे रहे है.

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