बरेली | उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बने तीन महीने होने को है लेकिन इस दौरान उनकी सरकार ने काफी बड़े और लोकप्रिय निर्णय भी लिए तो कुछ ऐसे मामले भी सामने आये जिसमे सरकार की काफी किरकिरी हुई. इनमे किसानो का कर्ज माफ़ करने से लेकर बूचडखानो पर रोक लगाने जैसे निर्णय शामिल थे. लेकिन सहारनपुर और संभल में हुई हिंसा ने सरकार की लोकप्रियता में बट्टा लगाने का काम किया. अब एक और मामला सामने आया है जिसमे योगी सरकार सवालों के घेरे में है.

बरेली के नवाबगंज पुलिस थाने में एक बीजेपी नेता के खिलाफ 33 मुक़दमे दर्ज किये गये थे. ये सभी मुक़दमे अखिलेश सरकार के दौरान दर्ज किये गए. लेकिन योगी सरकार बनने के तीन महीने के अन्दर ही इन सभी मामलो को खत्म कर दिया गया. यूपी पुलिस की इस त्वरित कार्यवाही से जहाँ सभी अचरज में है वही बीजेपी नेता पर केस करने वाली याची ने पुलिस के इस कदम को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है.

दरअसल फ़रवरी 2015 में बीजेपी के जिलाध्यक्ष रविन्द्र सिंह राठौर के खिलाफ समाजवादी नेता शहला ताहिर ने 33 केस दर्ज किये थे. शाहिला ने राठौर पर आरोप लगाया था की उन्होंने 2001 में नगर पालिका का चेयरमैन रहते हुए 33 दुकानो का दोबारा आवंटन किया था. ये सभी आवंटन फर्जी दस्तावेज के आधार पर किये गए थे. पुलिस के अनुसार उस समय यह मामला क्राइम ब्रांच को रेफेर कर दिया गया था.

उस समय राठौर पर धोखाधड़ी की धारा 420, 476, 468 और 392 के तहत मुकदमा दर्जा किया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने इन सभी मामलो में अदालत में क्लोजर रिपोर्ट सौप दी है. पुलिस का कहना है की सबूतों के आभाव में क्लोजर रिपोर्ट अदालत में जमा की गयी. उधर क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी सुभाष चंद्रा त्यागी ने बताया की अभी अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है, वही शाहिला ने पुलिस के फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है.


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