-अख़लाक़ अहमद उस्मानी*

मध्य एशिया में सबसे स्थिर और तेज़ गति से प्रगति करने वाले देश क़ज़ाख़स्तान में हर साल यूरोप और एशिया के मीडिया में छाए रहने वाले मुद्दों, विचारों, मत और प्रोपेगैंडा पर विमर्श होता है। इस बार यह आयोजन राजधानी अस्ताना की नई नवेली एक्सपो कांग्रेस इमारत में हुई  जिसमें सीरिया से लेकर डिजिटल क्रांति, श्रम से पूंजी और ऊर्जा से अर्थ तक के मुद्दों पर सार्थक, व्यापक और बहुकोणीय बातचीत हुई।

राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव ने जब सोवियत संघ से क़ज़ाख़स्तान की आज़ादी करने के फ़ौरन बाद पहली विदेश यात्रा भारत की की थी। भारत को क़ज़ाख़स्तान में बहुत सम्मान से देखा जाता है। इस मीडिया फ़ोरम में भारत या भारतीय मूल के तीन विशेषज्ञ शामिल हुए। पर्यावरणविद राजेन्द्र पचौरी, सिंगापुर में रणनीति विज्ञान के स्कॉलर ली क्वान विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर पराग खन्ना और अमेरिका में मशहूर डिजिटल मीडिया घराने दिसनाऊ की सम्पादक वर्षा शर्मा। ख़ास बात यह रही कि तीनों पेनलिस्ट तीन अलग विषयों पर संबोधित करने के लिए पहुँचे।

राजधानी अस्ताना में राष्ट्रपति नूरसुल्तान ने अति महत्वाकांक्षी योजना एक्सपो 2017 का इसी महीने उद्घाटन किया है जिसमें इस साल ‘भविष्य की ऊर्जा’ थीम पर लगभग हर विकसित और विकासशील देश ने अपनी प्रस्तुति दी है। भारत भी इस प्रदर्शनी में शामिल हुआ है। इस बार यूरेशियन मीडिया फ़ोरम की अध्यक्ष दरीगा नज़रबायेवा ने इसी थीम को मुख्य मुद्दा बनाया। एक्सपो का यह पहला कार्यक्रम है जबकि मीडिया फ़ोरम पिछले 15 साल से लगातार वार्षिक सम्मेलन आयोजित करती रही है। राजेन्द्र पचौरी ने हरित ऊर्जा पर बल दिया। सम्मेलन के इस सत्र में सतत विकास और भविष्य की ऊर्जा पर पचौरी के साथ संयुक्त राष्ट्र की यूएनईपी मध्य एशिया की प्रमुख नतायला एलेकज़ीवा, क़ज़ाख़स्तान के नवीन ऊर्जा संगठन के महानिदेशक अरमान काशकिनबिकोव और पौलेंड में रॉयल भूगोल संगठन के फ़ैलो जेकेक पालकीविज़ शामिल हुए। तेज़ी से हो रहे तकनीकी विकास के मद्देनज़र हरित ऊर्जा पर सरकारों के विशेष ध्यान देना होगा। सत्र में तेल के बदले हवा, पानी और सूर्य की ऊर्जा के वैकल्पिक इस्तेमाल पर बहुत खुली चर्चा हुई।

भारतीय मूल के रणनीति विशेषज्ञ पराग खन्ना दूसरे सत्र में ‘एशियाई अर्थव्यवस्था के चमत्कार’ में बोले। उनके साथ चीन विलय और अधिग्रहण संगठन के प्रमुख वाई वांग, अस्ताना अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संगठन के गवर्नर कैरात कलीमबेतोव, यूरेशिया फ़ाउंडेशन की अरीना नामसराई और रूस के सबरबैंक के प्रमुख जर्मन ग्रेफ़ शरीक़ हुए। मशहूर किताब ‘कनेक्टोग्राफ़ी’ के लेखक पराग खन्ना ने नए वैश्विक धाराओं का ज़िक्र करते हुए बताया कि डिजिटल होती दुनिया कितनी क़रीब आ जाएगी। वह जनजीवन की वकालत भी करते हैं और यह भी कहते हैं कि यह दुनिया हाइपर ग्लोबलाइज़ हो जाएगी। सप्लाई चैन की रणनीति के विशेषज्ञ खन्ना की नज़र में दुनिया की सबसे बड़ी सरहदें पानी और तेल पर बँटी है। इसी मौक़े पर अपनी पुस्तक के हस्ताक्षर कार्यक्रम के तहत खन्ना ने अपनी पुस्तक के बारे में भी लोगों को बताया।

तीन दिन तक चले यूरेशियन मीडिया फ़ोरम में सबसे व्यापक बहस सीरिया पर हुई। मध्य एशिया और रूस की सबसे चर्चित टीवी होस्ट सोफ़ी ने सत्र का संचालन करते हुए सीरिया पर चर्चा के लिए क़ज़ाख़स्तान के विदेश मंत्री कैरात अब्दरख़मानोव, फ्री सीरियाई आर्मी के राजनीतिक प्रतिनिधि सलीम हुदैफ़ा, सीरिया के पत्रकार आला इब्राहीम, तुर्की के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्लाह गुल, सीरिया पर डॉक्यूमेंट्री निर्माता शाहिदा तुलागनोवा और ईरान के मध्य एशिया के चिंतक कायहान बर्ज़ेगार को बुलाया। सम्मेलन में इस लेखक के वहाबी आतंकवाद के पीछे सऊदी अरब और तानाशाहों की तरफ़ से पलने वाले वहाबी मदरसों में आतंकवाद की ट्रेनिंग के तीखे सवालों पर सलीम हुदैफ़ा सकपका गए और उन्होंने इसे सिर्फ़ एक सम्प्रदाय माना जबकि सोफ़ी ने सवाल की ताइद की। श्रोताओं में उपस्थित इज़राइल के पूर्व रक्षा सलाहकार गिलेन शेर उस समय पानी पानी हो गए जब सीरियाई पत्रकार आला इब्राहीम ने साबित कर दिया कि इज़राइल सीरिया में आतंकवादियों का समर्थन ही नहीं करता बल्कि घायल आतंकवादियों का इलाज भी इज़राइली सेना के अस्पतालों में होता है। पूरा हॉल उस समय स्तब्ध रह गया जब फ्री सीरियाई आर्मी के राजनीतिक प्रतिनिधि सलीम हुदैफ़ा ने इज़राइल का बचाव किया और कहाकि कि इज़राइल सिर्फ़ आम सीरियाई लोगों का इलाज करता है। क़ज़ाख़स्तान के विदेश मंत्री ने कहाकि सीरिया पर हाल ही में शांति वार्ता राजधानी अस्ताना में आयोजित की गई है और हम क्षेत्र में शांति चाहते हैं।

दूसरे सबसे चर्चित सत्र में दुनिया में घटती डिजिटल दूरी और ऊँची होती दीवारों के साथ दुनिया में सबसे चर्चित टेलीविज़न पत्रकार निक गोइंग ने बहस का संचालन किया।

बहस में आधुनिक दुनिया की नई वास्तविकता अशांति और समाज के परिवर्तन को समझने की कोशिश की गई। सत्र में यह दलील उभर कर सामने आई कि पुराने रिश्तों से वैश्विक एकीकरण के नए रूपों की ओर बहता है। नई लीडरशिप पर कितना विश्वास किया जाए जबकि हमें नए युग में जाना ही जाना है। इस बात पर विमर्श काफ़ी गर्मागर्म रहा कि विकसित हों या विकासशील, सभी देशों के राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं और राजनीतिक क्षितिज को प्रभावित करने वाले संकटऔर जटिल परिस्थितियों में कैसे कार्य करना चाहिए? यूरोप, अमरीका और सीआईएस देशों में ‘नए विकास पथ’ पर काम शुरू करने के लिए कुशल रणनीतियों क्या हैं? इक्कीसवीं शताब्दी में विश्व व्यवस्था के संस्करण क्या हैं? इन मुद्दों को सुलझाने में अग्रणी देशों के बीच प्रभाव और बातचीत के प्रमुख क्षेत्रनक्या हैं?

श्रम और पूंजी पर बहुत सार्थक चर्चा हुई। निवेश की परिस्थितियाँ, एकीकरण एवं ज़बरदस्ती का ओद्यौगिकीकरण या रणनीतिक व्यापार- तीनों में कौन ज़िन्दा रहेगा? रूसी पत्रकार एंड्रू लेवचिंको के संचालन में विशेषज्ञों ने मालूम करने की कोशिश की कि 21 वीं सदी में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रिम वैश्विक आर्थिक विकास के लिए क्या नए नियम स्थापित किए जा रहे हैं। कच्चे माल के लिए विश्व की कीमतों पर निर्भरता के बावजूद, कई विकसित और विकासशील देशों की भू-राजनीतिक परिवर्तन के एक नए रास्ते के प्रति अपरिहार्य है। औद्योगिक उत्पादन के वैश्विक संकेतक अब तेल की कीमत गिरने शुरू होने के बाद स्थिर वृद्धि की भविष्यवाणी नहीं कर सकते। नई प्रौद्योगिकियों में निवेश गति प्राप्त कर रहे हैं, और बदले में, औद्योगिकीकरण नीति वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के प्रतिकूल प्रभाव को रोक नहीं सकती है। डिजिटल दुनिया के लिए उच्च गति की सफलता ने दुनिया की हमारी सामान्य समझ को हमेशा के लिए बदल दिया है। पूंजी, श्रम और बुद्धि कल की तीन ‘व्हेल’ हैं। जहां पूंजी प्राप्त करने के लिए, कौन काम करेगा और एक सफल राज्य बनाने के लिए प्रभावी ढंग से कैसे सोच सकता है?

डिजिटल क्रांति के सत्र का संचालन करते हुए सीएनएन के कंटेंट के उपाध्यक्ष ग्रेग बिचमैन ने इस बात पर बहस की कि डिजिटल सुधार और सुरक्षा रणनीति, ब्लॉक-चेन तकनीकी क्षमताओं और समाधानों के नए एल्गोरिदम के रूप में दुनिया कहाँ जा रही है? आधुनिक तकनीकें समाज का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और हर व्यक्ति का जीवन। विभिन्न देशों में नई प्रौद्योगिकियों की शुरूआत की दर में बदलाव के बावजूद, वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के संकेत, जैसे कि मोबाइल फोन, रेडियो या उपग्रह टेलीविजन, सबसे दूरदराज के इलाकों में भी पाए जाते हैं। पिछले दशकों में, दुनिया ने एक और वास्तविकता की दिशा में एक कदम उठाया है, जहां नैनोटेक्नॉलॉजी क्रांति का प्रबंधन करते हैं और सब कुछ आराम, सुविधा और लापरवाह जीवन के लिए किया जाता है। क्या मानव जाति के नए आविष्कारों के साथ आने की क्षमता पर कोई सीमा है? कल क्या लाना होगा? रोजमर्रा की जिंदगी में ब्लॉक-चेन तकनीक का उपयोग करने की संभावनाएं और जोखिम क्या हैं? तकनीकी आपदाओं, नई बीमारियों, वैश्विक महामारियों और प्राकृतिक आपदाओं के बिना भविष्य संभव है?

क़ज़ाख़स्तान बहस का व्यापक मंच है। यहाँ साल भर हर विषय पर सम्मेलन होते रहते हैं।

*लेखक अन्तरराष्ट्रीय मामलात के जानकार हैं


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